मृत्यु तो आती है … अवश्यम्भावी है
वो अज़र…. अमर… और सत्य है
वो महा शक्तिशाली . .शान्तिदायिनी है
पल में पीड़ा हरनेवाली असीम शान्ति है
जो आया है संसार में …..
राजा हो … रंक हो… या फ़कीर
सबके लिए मृत्यु का एक दिन तय है
समय तय है …..घड़ी तय है
कोई मृत्यु से लड़ नहीं सकता
कोई उससे जीत नहीं सकता
कोई चाहे भी चंद घड़ी
ज्यादा जी नहीं सकता
कोई चाहे भी तो मृत्यु के गाल से
किसी को छीन नहीं सकता
फिर जब हम जानते है ……कि
मृत्यु अवश्यम्भावी है … अटल है…
तो क्यों हर कोई
डरता है आसन्न मृत्यु से
लोग क्यों जीना चाहतें हैं हमेशा….
हमारे धर्म में मृत्यु का मतलब
आत्मा के द्वारा चोला बदलने का है
आत्मा कभी न जन्म लेती है
और न ही कभी मरती है
वो तय कार्यक्रम के अनुसार
जो तकदीर बनाती है
अपने चोले बदला करती है
अतः आइये हम
अपनी मौत से साक्षात्कार करें
उससे डरें नहीं… उसे प्यार करें
जब भी अवसर आये हँसते हँसते मरें
जब उसे आना ही है तो आये
अपना काम करे और चली जाये
फिर डरना और बिलखना कैसा
किसी के मरने पर रोना तो बेकार है
मरने के बाद पार्थिव शरीर भी बेकार है
उसे जलाओ .. धरती में दबावो या
पानी में बहावो…कुछ फर्क नहीं पड़ता
मृत्यु अतः स्वागत की चीज़ है
मृत्यु अतः स्वागत की ही चीज़ है
(समाप्त)
वो अज़र…. अमर… और सत्य है
वो महा शक्तिशाली . .शान्तिदायिनी है
पल में पीड़ा हरनेवाली असीम शान्ति है
जो आया है संसार में …..
राजा हो … रंक हो… या फ़कीर
सबके लिए मृत्यु का एक दिन तय है
समय तय है …..घड़ी तय है
कोई मृत्यु से लड़ नहीं सकता
कोई उससे जीत नहीं सकता
कोई चाहे भी चंद घड़ी
ज्यादा जी नहीं सकता
कोई चाहे भी तो मृत्यु के गाल से
किसी को छीन नहीं सकता
फिर जब हम जानते है ……कि
मृत्यु अवश्यम्भावी है … अटल है…
तो क्यों हर कोई
डरता है आसन्न मृत्यु से
लोग क्यों जीना चाहतें हैं हमेशा….
हमारे धर्म में मृत्यु का मतलब
आत्मा के द्वारा चोला बदलने का है
आत्मा कभी न जन्म लेती है
और न ही कभी मरती है
वो तय कार्यक्रम के अनुसार
जो तकदीर बनाती है
अपने चोले बदला करती है
अतः आइये हम
अपनी मौत से साक्षात्कार करें
उससे डरें नहीं… उसे प्यार करें
जब भी अवसर आये हँसते हँसते मरें
जब उसे आना ही है तो आये
अपना काम करे और चली जाये
फिर डरना और बिलखना कैसा
किसी के मरने पर रोना तो बेकार है
मरने के बाद पार्थिव शरीर भी बेकार है
उसे जलाओ .. धरती में दबावो या
पानी में बहावो…कुछ फर्क नहीं पड़ता
मृत्यु अतः स्वागत की चीज़ है
मृत्यु अतः स्वागत की ही चीज़ है
(समाप्त)
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