तुम करेला तो खैर
पहिले भी थे
अब नीम पर
चढ़ कर और
कडुवे हो गए हो
जब तक थे
वर्क्स मैनेजर
करते थे बकवास
दिखाते थे रुतबे
अपनी गन्दी
मानसिकता छिछोरापन
स्वार्थ से भरा
तुम्हारा व्यवहार
सारी इंसानियत भूल
हैवानियत का
खेल खेलते थे
और अब जब कि
तुम बन गए
डिप्टी जनरल मैनेजर
तुम्हारा अहं बढ़ गया है
बददिमागी तुम्हारे
ऊपर काबिज़ है
तुम किसी से सीधे
मुँह बात नहीं करते
हर किसी से
उलझ जाते हो
अपनी पदवी ओहदे का
रौब झाड़ते हो
जो असहाय दीन और
अपाहिज हैं उन पर
तुम्हारा रौब
नजला बनकर
बरस रहा है
लोग त्रस्त हो रहे हैं
आहें भर रहे हैं
बददुवा दे रहें है
आँसू पी रहें हैं
पर तुम उनका
शोषण करते नहीं थकते
हाँ एक तबका
ऐसा भी है
जिनसे तुम दबते हो
मनाते हो कि वे
कभी तुम्हारे
सामने न आयें
उनके सामने आते ही
तुम्हारी अदृश्य
दुम तुम्हारे
दोनों पैरो के बीच
दब जाती है
जबान तालू से
चिपक जाती है
गला खुश्क हो जाता है
तुम घिघियाने
मिमयाने लगते हो
क्योकि तुम
उन्हें झेल नहीं सकते
गलती पर जो थे न
तुम्हारा ज़मीर
तुम्हारा साथ नहीं देता
तुम्हारे पाप तुम्हारे
सामने आने लगते हैं
गुनाह आँखों के सामने
नाचने लगतें हैं
और तुम अचानक
रोबीले से ..कातर दुखी
दीनहीन नज़र आते हो
हाँ मैं नेता गणों की
बात ही कर रहा हूँ
गलती पर हो तभी तो
उन्हें फेस नहीं कर पाते
तुम्हारा सारा रौब
झड चुका होता है
और तुम
बीमार बीमार से
नज़र आते हो
यही हालत तुम्हारी
जनरल मैनजर साहब के
आगमन पर होती है
तुम्हारी पूरी
कोशिश होती है कि
तुम उनके दौरे पर
उनके सामने न पड़ो
पर वे तुम्हे
बुला या बुलवा लेते हैं
तुम्हारी जबान
तालू से चिपक जातीहै
दिल जोर जोर से
धडकने लगता है
कपडे पसीने से
गीले हो जाते हैं
आवाज़ मिमयाने
घिघियाने लगती है
तब तुम न कडुवे
दीखते हो न कसैले
तुम दीखते हो
बलिबेदी कि तरफ
घसीटे जाते
बकरे की तरह
जो चलता नहीं
घसीटा जाता है
वधस्थल की ओर
मैं तुम्हारे
दोनों रूपों को
भलीभांति जानता हूँ
तुम्हे खूब समझता हूँ
तुम एक कायर हो
महा डरपोक हो
केवल कमजोरों पर
रौब मारते हो
अतः मुझसे
संभल कर रहना
कहीं ऐसा न हो
कि मैं तुम्हें
बीच बाज़ार
न नंगा कर दूं
तुम्हारी आबरू की
चादर उतार दूँ
तुम करेला तो खैर
पहिले भी थे
अब नीम पर चढ़कर
ज्यादा कडुवे और
कसैले हो गए हो
पर मैं तुम्हारी
असलियत जानता हूँ
औरों से ज्यादा
तुम्हे पहिचानता हूँ समझे करेला जी
(समाप्त)
विशेष नोट :पुरानी डायरी सेपहिले भी थे
अब नीम पर
चढ़ कर और
कडुवे हो गए हो
जब तक थे
वर्क्स मैनेजर
करते थे बकवास
दिखाते थे रुतबे
अपनी गन्दी
मानसिकता छिछोरापन
स्वार्थ से भरा
तुम्हारा व्यवहार
सारी इंसानियत भूल
हैवानियत का
खेल खेलते थे
और अब जब कि
तुम बन गए
डिप्टी जनरल मैनेजर
तुम्हारा अहं बढ़ गया है
बददिमागी तुम्हारे
ऊपर काबिज़ है
तुम किसी से सीधे
मुँह बात नहीं करते
हर किसी से
उलझ जाते हो
अपनी पदवी ओहदे का
रौब झाड़ते हो
जो असहाय दीन और
अपाहिज हैं उन पर
तुम्हारा रौब
नजला बनकर
बरस रहा है
लोग त्रस्त हो रहे हैं
आहें भर रहे हैं
बददुवा दे रहें है
आँसू पी रहें हैं
पर तुम उनका
शोषण करते नहीं थकते
हाँ एक तबका
ऐसा भी है
जिनसे तुम दबते हो
मनाते हो कि वे
कभी तुम्हारे
सामने न आयें
उनके सामने आते ही
तुम्हारी अदृश्य
दुम तुम्हारे
दोनों पैरो के बीच
दब जाती है
जबान तालू से
चिपक जाती है
गला खुश्क हो जाता है
तुम घिघियाने
मिमयाने लगते हो
क्योकि तुम
उन्हें झेल नहीं सकते
गलती पर जो थे न
तुम्हारा ज़मीर
तुम्हारा साथ नहीं देता
तुम्हारे पाप तुम्हारे
सामने आने लगते हैं
गुनाह आँखों के सामने
नाचने लगतें हैं
और तुम अचानक
रोबीले से ..कातर दुखी
दीनहीन नज़र आते हो
हाँ मैं नेता गणों की
बात ही कर रहा हूँ
गलती पर हो तभी तो
उन्हें फेस नहीं कर पाते
तुम्हारा सारा रौब
झड चुका होता है
और तुम
बीमार बीमार से
नज़र आते हो
यही हालत तुम्हारी
जनरल मैनजर साहब के
आगमन पर होती है
तुम्हारी पूरी
कोशिश होती है कि
तुम उनके दौरे पर
उनके सामने न पड़ो
पर वे तुम्हे
बुला या बुलवा लेते हैं
तुम्हारी जबान
तालू से चिपक जातीहै
दिल जोर जोर से
धडकने लगता है
कपडे पसीने से
गीले हो जाते हैं
आवाज़ मिमयाने
घिघियाने लगती है
तब तुम न कडुवे
दीखते हो न कसैले
तुम दीखते हो
बलिबेदी कि तरफ
घसीटे जाते
बकरे की तरह
जो चलता नहीं
घसीटा जाता है
वधस्थल की ओर
मैं तुम्हारे
दोनों रूपों को
भलीभांति जानता हूँ
तुम्हे खूब समझता हूँ
तुम एक कायर हो
महा डरपोक हो
केवल कमजोरों पर
रौब मारते हो
अतः मुझसे
संभल कर रहना
कहीं ऐसा न हो
कि मैं तुम्हें
बीच बाज़ार
न नंगा कर दूं
तुम्हारी आबरू की
चादर उतार दूँ
तुम करेला तो खैर
पहिले भी थे
अब नीम पर चढ़कर
ज्यादा कडुवे और
कसैले हो गए हो
पर मैं तुम्हारी
असलियत जानता हूँ
औरों से ज्यादा
तुम्हे पहिचानता हूँ समझे करेला जी
(समाप्त)
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