हाँ मैं दर्द की तिज़ारत करता हूँ
मैं दर्द बोता हूँ उसे उगाता हूँ
उसे सींचता हूँ निराता हूँ
उसे सहेजता और बचाता हूँ
कलेज़े में समेट
फसल तैय्यार होने पर
मैं उसे काटता हूँ और
साफ़ सफाई के बाद
जो खालिस. दर्द बचता है
मैं उस दर्द की तिज़ारत करता हूँ
लोगों से शेयर करता हूँ
अपने दर्द को बयाँ करता हूँ
उनके दुःख दर्द भी शेयर करता हूँ
और इस सारे दर्द को कविता
कहानियॉं या सोंच विचार में सजा
मैं इसकी तिज़ारत करता हूँ
हाँ यह और बात है
कि यह तिज़ारत
पैसे के लिए मैं नहीं करता
यह तो मेरा फ़र्ज़ है और शौक भी
कि दर्द बाँटा जाये
साझा किया जाय
अपनों और गैरों के बीच
समस्त मानव कल्याण हेतु
अतः यह एक सच है
और मैं मानता हूँ
कि मैं दर्द क़ी तिज़ारत करता हूँ
और इस तरह अपने समाज देश
और ऊपरवाले का
क़र्ज़ अदा करता हूँ
मैं दर्द बोता हूँ उसे उगाता हूँ
उसे सींचता हूँ निराता हूँ
उसे सहेजता और बचाता हूँ
कलेज़े में समेट
फसल तैय्यार होने पर
मैं उसे काटता हूँ और
साफ़ सफाई के बाद
जो खालिस. दर्द बचता है
मैं उस दर्द की तिज़ारत करता हूँ
लोगों से शेयर करता हूँ
अपने दर्द को बयाँ करता हूँ
उनके दुःख दर्द भी शेयर करता हूँ
और इस सारे दर्द को कविता
कहानियॉं या सोंच विचार में सजा
मैं इसकी तिज़ारत करता हूँ
हाँ यह और बात है
कि यह तिज़ारत
पैसे के लिए मैं नहीं करता
यह तो मेरा फ़र्ज़ है और शौक भी
कि दर्द बाँटा जाये
साझा किया जाय
अपनों और गैरों के बीच
समस्त मानव कल्याण हेतु
अतः यह एक सच है
और मैं मानता हूँ
कि मैं दर्द क़ी तिज़ारत करता हूँ
और इस तरह अपने समाज देश
और ऊपरवाले का
क़र्ज़ अदा करता हूँ
(समाप्त)
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