Wednesday, 22 July 2015

सोंच विचार : हम और हमारा भारतीय परिवार .....


हमारा देश  भारत    भी   कहलाता है
इंडिया    भी    और    हिंदुस्तान   भी
सुविधा   अनुसार   हम   इसे  अपने
पसंद के   नाम   से  बुलाते  हैं  तीनो
ही नाम सही हैं हम  घर  किसी   को
चुन्नू मुन्नू  या लवी  बुलाते हैं    पर
स्कूल में उसका अलग नाम    होता
है कभी कभी उसी का कोई   तीसरा
नाम भी होता है हमारे देश का नाम
अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में  इंडिया है और
सभी विदेशी हमें इंडियन के   नाम
से जानते  और मानते हैं    यहाँ  के
रहनेवाले सभी लोग चाहे  वे  किसी
भी धर्म     जाति या    प्रदेश  के हो
इंडियन  के    नाम से जाने जाते है
पर  अन्य   दोनों नाम भी उतने ही
लोकप्रिय    और चलन  में है   हम
भारतीय कहलाना भी पसंद करते
हैं और हिंदुस्तानी भी

जब अन्य सभी देशो में उनके लोग
धर्म भाषा     भिन्न  भिन्न होने के
बावजूद देश के नाम से  जाने जाते
है जैसे   चीन में चीनी रूस में  रूसी
ब्रिटेन में    ब्रिटिश     अमेरिका में
अमेरिकी   तो अगर    हमारे  लोग
इंडियन या भारतीय या हिंदुस्तानी
कहकर बुलाये    जाते हैं तो    क्या
आपत्ति हो सकती है  हमारे देश के
इतिहास     को   जानने  वाले    ये
जानते    है   इस   देश में    विदेशी
आक्रमणकारी जातियाँ यथा  आर्य
हूडं कुषाण मंगोल तुर्क आये   इसे
लूटा पर इसे अपना घर  बना यहीं
बस गये धीरे धीरे ये सब आपस में
मिलते  गये  और   क्योकि   अरब
लोग   इस देश के सभी रहने वालों
को  हिन्दू कहते   थे  इस   देश को
हिंदुस्तान बुलाने लगे पर   बाद में
आनेवाले सभी आक्रमणकारी इस
तथ्य को पहिचान गये कि     यदि
शीघ्र कुछ न किया गया तो हमारी
पहिचान   भी ख़त्म     हो जाएगी
इसीलिए    उन्होंने अपनी  अलग
पहिचान बनाये    रखने के   लिये
अपनी    अलग  भाषा    पहिचान
वेशभूषा विकसित की इस्लाम व्
क्रिश्चियन धर्म इसके उदाहरण हैं

हम सब    जानते  है   कि  वेश भूषा
खानपान   भाषा  जलवायु स्थानीय
संसाधनों पर   निर्भर होती है इसमें
जाति या धर्म या मान्यता की  कोई
भूमिका नहीं होती यथा   केरल  का
रहन सहन   कश्मीर से    बिलकुल
अलग है बंगाल   और   तमिलनाडु
भी पूरी तरह  भिन्न  हैं  इसी प्रकार
अन्य लोग भी   एक   दूसरे से  पूरी
तरह भिन्न है   पर  आश्चर्य     और
सुखद बात यह  है कि हम सब एक
महान देश के अंग  है   जो   तमाम
विविधताओं   के   बावजूद      एक
महान   जनतंत्र  के रूप में  खड़ा है
और हम   अपने आपको  भारतीय
हिंदुस्तानी या    इंडियन  कहलाने
में गर्व      महसूस  करते हैं हमारी
संसद हमारे  कानून  हमारे तिरंगे
व् देशवासियों पर  हमें नाज़ है जो
पूरे  विश्व   में   अपनी      योग्यता
हिम्मत   और मेहनत   का   लोहा
मनवा रहे हैं  पर गेहूं में   घुन   की
तरह     और मकान में दीमक  की
तरह यहाँ कुछ  ऐसे भी   लोग  या
संस्थायें भी हैं जो  निहित   स्वार्थ
वश     इस देश का जानबूझ    कर
अहित करते हैं और देश के  लोगों
को धर्म भाषा छेत्र याअगड़े पिछड़े
य़ा  लिंग के नाम पर लडाना  और
अस्थिर करना   चाहते हैं    हमारे
पडोसी देश भी इस मुहीम में उन्हें
परोक्ष अपरोक्ष सहायता करते  हैं
यह वर्ग इस देश की भलाई   नहीं
चाहता   खुशहाली   नहीं   चाहता
अतः    लड़ाई      अलगाववाद    को
बढ़ावा और   समर्थन देता है     और
हमें   आपस में लडवा   वो     किसी
प्रकार सत्ता में    बने रहना   चाहता
है कभी   कभी   यह   वो     देश की
अखंडता और भाई चारा की कीमत
पर भी    करता  है  अभी     पिछले
दिनों   किसी ने फ़रमाया   इस देश
के   रहने  वाले   सभी    हिन्दू     हैं
और तुरंत दूसरों ने विवाद  शुरू कर
दिया  क्या हम  नहीं    जानते   यह
सब हरकतें जानबूझ    कर देश  के
भाई चारा  और   सौहार्द बिगड़ने के
लिए      की  जाती    है    कि     छुद्र
राजनीतिक लाभ   लिए जा     सकें
चाहे वो    देश   की कीमत पर  क्यों
न हो  ऐसे सभी  व्यक्तियों     समूहों
व् संस्थाओं से   सावधान रहने और
उन्हें   नियंत्रण में   रखने  की आज
बड़ी   आवश्यकता  है और   केवल
जागृत देश भक्त जनता ही  यह कर
सकती है
(समाप्त)

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