बेटी के साथ
नदी किनारे
घूमते घूमते
मुझे और
मेरी बेटी को
एक सुन्दर
मखमली टोकरी दिखी
उत्सुकतावश जब
बेटी ने
उसे उठा लिया
और मेरे
मना करने से पहिले
उसे खोल भी लिया
देखा तो
एक सुन्दर साँप
छोटा सा
पतला सा
निरीह सा
गोल गोल सा
उसमे पड़ा था
मैंने बेटी को
मना किया
कि बेटा
साँप की जाति
बड़ी जहरीली और
खतरनाक होती है
उसे अपने
पास रखने से
नुकसान ही होता है
पर बेटी तो उस
साँप की सुन्दरता
और निरीहता पर
मुग्ध थी
कुछ भी सुनने
और समझने को
तैयार नहीं थी
उस साँप को
घर ले चलने
की जिद्द कर बैठी
समझाना बुझाना
बे असर हो गया
वो सारे पैतरे
आजमाने लगी
अनुनय विनय से
चीखने चिल्लाने
और रोने तक
बेटी का प्यार
मेरी बुद्धि पर
भारी पड़ा
उस साँप को
हम घर ले आये
एक सुन्दर
पिंजरे में
उसे रक्खा
घरवालों मिलने वालों
दोस्तों पड़ोसियों
सबने समझाया पर
बेटी कुछ भी सुनने
सोंचने समझने को
तैयार नहीं
उसके आगे
सबको झुकना ही पड़ा
बेटी उस साँप को
अपने पास रखती
उसकी देखभाल करती
उसे दूध पिलाती
धीरे धीरे
बेटी भी
बड़ी होने लगी
और सफ़ेद साँप भी
अब साँप
बड़ा हो गया था
और सुन्दर भी
हाँ वो अब
फुफकारने और
फन पटकने लगा था
कभी कभी
गुस्से में वो
बड़ा खतरनाक
दिखने लगा था
अब हम सब भी
सशंकित हो गए
फिर से
सबने बेटी को
समझाया कि
बेटी सुन्दर और
सफ़ेद होने के
बावजूद यह एक
खतरनाक और जहरीला
साँप ही तो है
इससे दूर ही
रहा जाये तो अच्छा
यह कभी भी
किसी को भी
नुकसान पहुंचा सकता है
इसे बाहर छोड़
आने में ही भलाई है
पर बेटी
उसके मोंह में
बुरी तरह उलझी थी
कुच्छ भी
सुनने समझने को
तय्यार नहीं थी
एक दिन
सबकी सलाह पर
चुप चाप जब बेटी
घर से बाहर
कहीं गयी थी
उस साँप को सुदूर
जंगल में छोड़ आया
वापस आने पर
उस साँप को न पा
उसने रो रोकर
चिल्ला चिल्ला कर
अपने को और
सारे घर को
हलकान कर लिया
मुझे वो साँप चाहिए
मुझे उससे
प्यार हो गया है
वोह मुझे
कुछ भी
नुकसान नहीं करेगा
बहुत समझाने पर भी
वोह न मानी
और उस साँप को
ढूँढने निकल गयी
दो दिन बाद
जब वोह लौटी तो
उसके चेहरे पर ख़ुशी
और होंठों पर
मुस्कान थी
वोह साँप
बड़े खतरनाक
तरीके से
उसके गले में
लिपटा था
अब हम सभी के
होश उड़ गए
लड़की साँप
छोड़ने को तैयार नहीं
और साँप लड़की को
छोड़ने को तैयार नहीं
समझाना बुझाना
सुब बेकार हो रहा था
साँप फिर से
हमारे घर में
आ गया था
एक दिन वही हुवा
जिसका हमें डर था
साँप ने लड़की को
डंस लिया
बेटी बेहोश थी
सारा शरीर नीला था
मुँह से फेन बह रहा था
हम उसे लेकर
अस्पताल भागे
डाक्टरों की मेहनत
और हमारे भाग्य ने
साथ दिया
लड़की की जान बच गयी
उसका शरीर पीला था
वोह बहुत उदास थी
खैर समय के साथ
हम उस हादसे को
भूल गए
लड़की की सेहत और
सूरत निखर आयी
वोह फिर से बतियाने और
मुस्कराने लगी
समय देख एक सुन्दर से
राजकुमार से लड़के से
उसकी शादी करा दी
अब वोह अपने परिवार में
और हम अपने संसार में
खुश और प्रसन्न हैं
उस हादसे को
भूल चुके हैं
इस घटना की कहानी
इसलिए दुहरा रहें हैं
कि फिर कोई पिता
बेटी की गलत और
गैर वाजिब माँग को
न झुके न माने बल्कि
सख्ती से मना करे
ताकि ऐसे हादसों
की पुनरावृत्ति
फिर कभी न हो
फिर कभी न हो
फिर कभी न हो
(समाप्त)
नदी किनारे
घूमते घूमते
मुझे और
मेरी बेटी को
एक सुन्दर
मखमली टोकरी दिखी
उत्सुकतावश जब
बेटी ने
उसे उठा लिया
और मेरे
मना करने से पहिले
उसे खोल भी लिया
देखा तो
एक सुन्दर साँप
छोटा सा
पतला सा
निरीह सा
गोल गोल सा
उसमे पड़ा था
मैंने बेटी को
मना किया
कि बेटा
साँप की जाति
बड़ी जहरीली और
खतरनाक होती है
उसे अपने
पास रखने से
नुकसान ही होता है
पर बेटी तो उस
साँप की सुन्दरता
और निरीहता पर
मुग्ध थी
कुछ भी सुनने
और समझने को
तैयार नहीं थी
उस साँप को
घर ले चलने
की जिद्द कर बैठी
समझाना बुझाना
बे असर हो गया
वो सारे पैतरे
आजमाने लगी
अनुनय विनय से
चीखने चिल्लाने
और रोने तक
बेटी का प्यार
मेरी बुद्धि पर
भारी पड़ा
उस साँप को
हम घर ले आये
एक सुन्दर
पिंजरे में
उसे रक्खा
घरवालों मिलने वालों
दोस्तों पड़ोसियों
सबने समझाया पर
बेटी कुछ भी सुनने
सोंचने समझने को
तैयार नहीं
उसके आगे
सबको झुकना ही पड़ा
बेटी उस साँप को
अपने पास रखती
उसकी देखभाल करती
उसे दूध पिलाती
धीरे धीरे
बेटी भी
बड़ी होने लगी
और सफ़ेद साँप भी
अब साँप
बड़ा हो गया था
और सुन्दर भी
हाँ वो अब
फुफकारने और
फन पटकने लगा था
कभी कभी
गुस्से में वो
बड़ा खतरनाक
दिखने लगा था
अब हम सब भी
सशंकित हो गए
फिर से
सबने बेटी को
समझाया कि
बेटी सुन्दर और
सफ़ेद होने के
बावजूद यह एक
खतरनाक और जहरीला
साँप ही तो है
इससे दूर ही
रहा जाये तो अच्छा
यह कभी भी
किसी को भी
नुकसान पहुंचा सकता है
इसे बाहर छोड़
आने में ही भलाई है
पर बेटी
उसके मोंह में
बुरी तरह उलझी थी
कुच्छ भी
सुनने समझने को
तय्यार नहीं थी
एक दिन
सबकी सलाह पर
चुप चाप जब बेटी
घर से बाहर
कहीं गयी थी
उस साँप को सुदूर
जंगल में छोड़ आया
वापस आने पर
उस साँप को न पा
उसने रो रोकर
चिल्ला चिल्ला कर
अपने को और
सारे घर को
हलकान कर लिया
मुझे वो साँप चाहिए
मुझे उससे
प्यार हो गया है
वोह मुझे
कुछ भी
नुकसान नहीं करेगा
बहुत समझाने पर भी
वोह न मानी
और उस साँप को
ढूँढने निकल गयी
दो दिन बाद
जब वोह लौटी तो
उसके चेहरे पर ख़ुशी
और होंठों पर
मुस्कान थी
वोह साँप
बड़े खतरनाक
तरीके से
उसके गले में
लिपटा था
अब हम सभी के
होश उड़ गए
लड़की साँप
छोड़ने को तैयार नहीं
और साँप लड़की को
छोड़ने को तैयार नहीं
समझाना बुझाना
सुब बेकार हो रहा था
साँप फिर से
हमारे घर में
आ गया था
एक दिन वही हुवा
जिसका हमें डर था
साँप ने लड़की को
डंस लिया
बेटी बेहोश थी
सारा शरीर नीला था
मुँह से फेन बह रहा था
हम उसे लेकर
अस्पताल भागे
डाक्टरों की मेहनत
और हमारे भाग्य ने
साथ दिया
लड़की की जान बच गयी
उसका शरीर पीला था
वोह बहुत उदास थी
खैर समय के साथ
हम उस हादसे को
भूल गए
लड़की की सेहत और
सूरत निखर आयी
वोह फिर से बतियाने और
मुस्कराने लगी
समय देख एक सुन्दर से
राजकुमार से लड़के से
उसकी शादी करा दी
अब वोह अपने परिवार में
और हम अपने संसार में
खुश और प्रसन्न हैं
उस हादसे को
भूल चुके हैं
इस घटना की कहानी
इसलिए दुहरा रहें हैं
कि फिर कोई पिता
बेटी की गलत और
गैर वाजिब माँग को
न झुके न माने बल्कि
सख्ती से मना करे
ताकि ऐसे हादसों
की पुनरावृत्ति
फिर कभी न हो
फिर कभी न हो
फिर कभी न हो
(समाप्त)
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