मैंने तुमसे प्यार किया है
मेरा दिल तुम पर वार दिया है
तुमने तो की मनमानी
तुमने मेरी क़दर न जानी
मुझको यूँ ही छोड़ गयी हो तुम
दिल को मेरे तोड़ गयी हो तुम
तुमको तो प्रभु जी ने बुलाया
पर मेरा बुलावा अब तक न आया
कैसे तुम बिन जियूँ बतलाओ
इस दिल को राहत पहुँचाओ
तुम बिन जिया न जाता अब तो
तुम बिन मरा भी न जाता अब तो
सोंच सोंच पगला जाता हूँ
इस दुनिया में अकेला घबरा जाता हूँ
तुम्हे चैन पड़ती है कैसे
मुझ बिन रहती हो तुम कैसे
उस जहाँ में क्या
तुम बिल्कुल ठीक ठाक हो
खुश हो या कि उदास हो
क्या मुझे याद करती हो
क्या तुम अब भी
मुझ पर मरती हो
कैसे कटते हैं सब पल छिन
कैसे रहती हो तुम मुझ बिन
मेरी हसीना मेरी प्यारी
क्यों दे गयी तुम ये बीमारी
न तो मैं जी पाता हूँ
और न ही मर पाता हूँ
याद तुम्हारी बहुत आ रही
दिल से रुलाई छूट पड़ रही
आंसू की धारें बहती हैं
सिसकियों की लहरें उठती हैं
रो रो कर हलकान हो रहा
मेरा बुरा हाल हो रहा
पहिले कभी ऐसे न रोया
रो रोकर आपा न खोया
आँसू निकलते ही तुम आ जातीं
उन्हें पोंछ सिर न में हिलातीं
सहारा देकर तुम मेरा हौसला बढ़ातीं
अब जब पास नहीं हो तुम
अब जब दूर गयी हो तुम
कौन मुझे हौसला दिलाये
आंसूं पोंछे और हँसाये
भगवान जी से प्रार्थना ये करना
मुझे भी शीघ्र बुला ले ये विनती करना
इतना तो तुम कर ही सकती हो
और मुझे प्रसन्न कर सकती हो
बोलो क्या तुम इतना करोगी
मुझ पर यह एहसान करोगी
(समाप्त)
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