नाना जी सुबह की मखमली धूप में
अख़बार का आनंद ले रहे थे कि गोलूजी
पापा के साथ बाहर कार से सैर कर के आये
और धप से नाना की गोद में कूद पड़ेअचानक
इस हमले से नाना जी चौंक पड़े और बोले
अरे भाई गोलू जी जरा ठीक से बैठो अब तुम
बड़े हो गए हो
नाना जी की बात अभी पूरी भी न हुयी कि
गोलू जी ने सवाल दागा ,नाना जी मौत क्या
होती है नानाजी बोले भाई ऐसा क्या हुआ कि
आप ऐसा सवाल कर रहें है गोलू जी बोले
रस्ते में एक आदमी को लेकर लोग काँधों पे
उठा कर जा रहे थे लोग बोल रहे थे कुछ सत्य
है सत्य है पापा जी से पूंछा तो बोले उसकी
मौत हो गयी है अब आप बताइये मौत क्या
होती है
नाना जी बोले अब आपके पापा कार से निकल
कर घर में चले गए क्या अब कार अपने आप
चल सकती है गोलू जी बोले बिलकुल नहीं वोह
तो या तो ड्राईवर अंकल या पापा जी चलाएंगे
तभी तो वो चलेगी , नानाजी बोले अब सुनो
जैसे बिना ड्राइवर कार नहीं चल सकती वैसे ही
बिना आत्मा शरीर नहीं चल सकता आत्मा
यानि भगवान का अंश जैसे ही आत्मा गयी
शरीर मर जाता है गोलू जी इस स्पष्टी करण से
संतुष्ट नहीं दिख रहे थे तो नानाजी ने उनसे कहा
अच्छा बताओ बल्ब या पंखा कब बंद पड़
जाता है गोलू बोले जब बिजली नहीं आती
या हम उसका स्विच बंद कर देते हैं नानाजी
बोले इसी प्रकार जब शरीर का भगवान से
सम्बन्ध टूट जाता है या तोड़ दिया जाता है तो
परमात्मा का अंश निकल जाता है और शरीर
मर जाता है इसे ही “मौत” कहते है शरीर
अब किसी काम का नहीं रहता और
मान्यतानुसार उसे जला दफना या पानी में
प्रवाहित कर दिया जाता है जैसे हम कार में
पेट्रोल डालतें है और तभी वोह चलती है ठीक
इसी प्रकार शरीर को जिन्दा रहने और काम
करने के लिए भोजन की आवश्यकता पड़ती है
और जैसे कार ख़राब होने पर उसे ठीक कराने
गैराज में ले जाते हैं वैसे शरीर बीमार होने पर
गैराज में ले जाते हैं वैसे शरीर बीमार होने पर
अस्पताल या डाक्टर के पास ले जाते हैंऔर जब
कार बिलकुल ख़राब हो जाती है यानी चलने
लायक नहीं रहती तो उसे मरा हुआ मान लेते हैं
बात गोलू जी के समझ में आ चुकी थी और वोलायक नहीं रहती तो उसे मरा हुआ मान लेते हैं
खरामा खरामा निकल लिए
(समाप्त)
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