इसी प्रकार जब बहू को अपने माँ बाप
और सास ससुर में चुनने को कहा जाये
तो बहुधा वोह अपने माँ बाप को ही चुनती है
इसमें अस्वाभाविक कुछ नहीं यह पूर्णतया
प्राकृतिक और स्वाभाविक चुनाव है पर यदि
बहू की सास उसकी सचमुच की माँ बनना
चाहती है और चाहती है कि बहू भी दिल से
उसे माँ समझे और माने तो उसे एक
ईमानदार कोशिश तो करना ही होगा और ये
कोशिश तो की ही जा सकती है और हर घर
में सदा रहनेवाली शांति आ सकती है
ठीक इसी प्रकार दामाद यदि अपने सास ससुर
को अपने माँ बाप की तरह ही माने और पुत्रवत
व्योहार करे तो सास ससुर उसके सचमुच के
माँ बाप बन सकते है और उसकी पत्नी भी अपने
सास ससुर की बेटी बन सकती है और यह
असंभव भी तो नहीं एक ईमानदार कोशिश तो की
ही जा सकती है और हर घर में सदा रहने वाली
शांति आ सकती है
अतः जरूरत इस बात की है की इस तरफ एक
ईमानदार कोशिश की जाये ताकि हर घर हर
मोहल्ला पूरा समाज पूरा देश एक निखालिस
स्वर्ग बन जाये इसीलिए मैं कहता हूँ कि
:”कोशिश तो की ही जा सकती है “
हाँ कोशिश तो की ही जा सकती है
सचमुच कोशिश तो की ही जा सकती है
आमीन आमीन आमीन
(समाप्त)

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