
मंजुश्री से चला टेम्पो 
हिन्दू मुसलमान ईसाई
हिन्दू मुसलमान ईसाई
सभी सवार
कोपरगंज पहुँचते पहुँचते
जोर जोर से झूलने लगा
हिलने लगे झूलने लगे
हिन्दू मुसलमान ईसाई
सभी सवार
सभी सवार
टेम्पो इधर झुकता
तो सभी इधर झुकते
तो सभी इधर झुकते
टेम्पो उधर झुकता
तो सभी उधर झुकते
तो सभी उधर झुकते
न था कोई भेद
हिन्दू मुसलमान ईसाई का
ये सड़क के गड्ढे सभी को
एकसा ही खेल खिला रहे थे
उनमे भरा गन्दा पानी
सभी को मुँह चिढ़ा रहा था
सभी को मुँह चिढ़ा रहा था
सभी एक स्वर से
नगर निगम को
नगर निगम को
नेताओं को कोस रहे थे
और उनको भी जो
मॉल रोड पर
शानदार कारों में चलते है
मॉल रोड पर
शानदार कारों में चलते है
उन्हें भी जिनके
घरों में कोने भी
घरों में कोने भी
सदा रोशन रहतें हैं
हिन्दू मुसलमान
ईसाई का भेद
ईश्वर भी नहीं करता है
ईसाई का भेद
ईश्वर भी नहीं करता है
जो सबका सृजन करता है
सभी को दिये
दो कान दो आँख
दो कान दो आँख
सुन्दर सी नाक और
एक सा रूप सिंगार
एक सा रूप सिंगार
फिर इंसान कब और कैसे
हिन्दू मुसलमान या
ईसाई बन जाता है
ईसाई बन जाता है
मरता है मारता है
एक दुसरे को
एक दुसरे को
पागल दरिंदों की तरह
पैने दाँतो से
नोंच खाने को
आतुर हो उठता है
पर जब एक ही
टेम्पो में सवार हो
टेम्पो में सवार हो
हिन्दू मुसलमान और ईसाई
एक सरीखे झूला झूलते
कोपरगंज की सड़क के
गड्ढो से गुज़रते हैं
गड्ढो से गुज़रते हैं
बड़े ही बेबस
दुखी और कातर दीखतें है
दुखी और कातर दीखतें है
और मासूमियत का
एक अनुपम रूप ही दीखते है
एक अनुपम रूप ही दीखते है
जरा सोचिएं कौन ………?.
कौन बनाता है इन्हे
हिन्दू मुसलमान या ईसाई
भुला के यह तथ्य
कि वो पहिले एक इन्सान है
और बाद में अपनी
धार्मिक मान्यता के अनुसार
धार्मिक मान्यता के अनुसार
हिन्दू मुसलमान या ईसाई
बस यहीँ विचार ज़रूरी है
उन्हें भड़काने वालों की
पहिचान ज़रूरी है
पहिचान ज़रूरी है
ताकि उन्हें पकड़ा जा सके
उन्हें सजा दी जा सके
ताकि बची रहे इन्सानियत
हमारी गंगाजमनी तहजीब
बचे रहें हमारे सब
हिन्दू मुसलमान और ईसाई
बचके रहें सब इंसान
हमारे हिन्दू ईसाई
और मुसलमान
और मुसलमान
न बने किसी बहकावे में हैवान
हमारे प्यारे देश भारत के
रहवासी उसके प्यारे
उसकी सन्तान
उसकी सन्तान
काश ऐसा हो
काश ऐसा हो
काश ऐसा ही हो
आमीन आमीन आमीन
(समाप्त )
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