हैं से थे तक
जो सफ़र होता है
वो ही जीवन कहलाता है
आज हम हैं कल नहीं
किसी कमरे की
सपाट दीवार में
या किसी एल्मारी के कोने में
फूल माले में हमारी फोटो
सुबह शाम जलती
अगरबत्ती या दिया
कभी वोह भी नहीं और केवल
चाहनेवालों का अश्रु पूर्ण आँखों से
कभी कभी ताकना
ये सब तो होता ही है
यह सब तो होना ही है
फिर क्यों हम अपना
आज बिगड़तें हैं भाग दौड़ में
हाय तोबा में
लालच में प्रपंच में
भुला के ईश्वरीय सन्देश
उसका ………… आदेश
कि प्रथ्वी पर जा कर
क्या करना है और क्या नहीं
बस आज की फ़िक्र में
चूल्हा चक्की की फ़िक्र में
घर गृहस्थी के चक्कर में
बिगड़ते हैं इह लोक
और परलोक भी
हम सभी यह गलती करते हैं
इस यात्रा में
हैं से थे तक
जो सफ़र होता है
वो ही जीवन कहलाता है
आज हम हैं कल नहीं
किसी कमरे की
सपाट दीवार में
या किसी एल्मारी के कोने में
फूल माले में हमारी फोटो
सुबह शाम जलती
अगरबत्ती या दिया
कभी वोह भी नहीं और केवल
चाहनेवालों का अश्रु पूर्ण आँखों से
कभी कभी ताकना
ये सब तो होता ही है
यह सब तो होना ही है
फिर क्यों हम अपना
आज बिगड़तें हैं भाग दौड़ में
हाय तोबा में
लालच में प्रपंच में
भुला के ईश्वरीय सन्देश
उसका ………… आदेश
कि प्रथ्वी पर जा कर
क्या करना है और क्या नहीं
बस आज की फ़िक्र में
चूल्हा चक्की की फ़िक्र में
घर गृहस्थी के चक्कर में
बिगड़ते हैं इह लोक
और परलोक भी
हम सभी यह गलती करते हैं
इस यात्रा में
हैं से थे तक
अतः जरूरत है कि हम
अपना लक्ष्य पहिचाने
ईश्वरीय आदेश याद रक्खें
और उसे माने
तो शायद यह दुनिया
रहने लायक बन जाये
और इस धरती पर
निखालिस स्वर्ग उतर आये
आमीन आमीन आमीन
(समाप्त)
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