
मंदिर में बैठा भगवान
किसी के लिए आराध्य
किसी के लिए पत्थर
किसी का पूज्य होता है
मंदिर मस्जिद चर्च गुरुद्वारा
हैं उसके रहने के स्थान
और खुदा गॉड वाहे गुरु
उसके नाम और सम्मान
हम सभी एक ही हस्ती के
गुण गाते हैं और पूजतें है
उसके भिन्न भिन्न नामों
के मकड़ जालों में उलझ
आपस में लड़ते
और मरते है
मज़े की बात कि हम
ये धर्म के नाम पर करते है
याद रखिये कोई भी धर्म
हमें ईर्ष्या या
द्वेष. नहीं सिखाता
बल्कि करुणा और
परस्पर प्यार का सन्देश दे
सब धर्मों का आदर और
परस्पर साथ सिखाता
फिर कौन है जो
अपने छुद्र
स्वार्थों की खातिर
हमारे दिमागों को फेरता
हमें परस्पर लड़ाता
और हमारी तरक्की रोक
अपने स्वार्थ बनाता
वोह ही स्वार्थी हमें
प्रभु के बताये मार्ग से
भटकाता और डिगाता
अतः होशियार बनो
सबसे प्यार करो
ईश्वर से प्यार करो
यही तो कहता है
मंदिर में बैठा भगवान
हमसभी उसकी संतान
किसी के लिए आराध्य
किसी के लिए पत्थर
किसी का पूज्य होता है
मंदिर मस्जिद चर्च गुरुद्वारा
हैं उसके रहने के स्थान
और खुदा गॉड वाहे गुरु
उसके नाम और सम्मान
हम सभी एक ही हस्ती के
गुण गाते हैं और पूजतें है
उसके भिन्न भिन्न नामों
के मकड़ जालों में उलझ
आपस में लड़ते
और मरते है
मज़े की बात कि हम
ये धर्म के नाम पर करते है
याद रखिये कोई भी धर्म
हमें ईर्ष्या या
द्वेष. नहीं सिखाता
बल्कि करुणा और
परस्पर प्यार का सन्देश दे
सब धर्मों का आदर और
परस्पर साथ सिखाता
फिर कौन है जो
अपने छुद्र
स्वार्थों की खातिर
हमारे दिमागों को फेरता
हमें परस्पर लड़ाता
और हमारी तरक्की रोक
अपने स्वार्थ बनाता
वोह ही स्वार्थी हमें
प्रभु के बताये मार्ग से
भटकाता और डिगाता
अतः होशियार बनो
सबसे प्यार करो
ईश्वर से प्यार करो
यही तो कहता है
मंदिर में बैठा भगवान
हमसभी उसकी संतान
(समाप्त)
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