ऐसे ही
मैंने फ़ोन लगाया फूल को
कली ने उठा लिया
बोली क्या चाहिये अंकल जी
मैंने फोन काटा
दुबारा फ़ोन लगाया फूल को तो
कांटे ने उठा लिया
बोला कौन साहब बोल रहे हैं
मैंने फिर फ़ोन काटा
एक बार और भाग्य अजमाया
फ़ोन फिर फूल को लगाया
और देखो भाग्य मुस्कराया
फूल ने खुद फ़ोन उठाया
बोली हमारे अहोभाग्य
आपने याद तो फ़रमाया
इतने दिन के बाद
हमारा ख्याल तो आया
जाओ हम आप से नहीं बोलते
अपने दिल की तमाम परतें
आपके सामने नहीं खोलते
बस इतना ही प्यार करते हो हमें
कितना तरसाते तडपाते हो हमें
याद भी है हम
पिछली बार कब मिले थे
और मिलकर जीवन की
मधुर चाशनी का रस पिये थे
तुम तो हरजाई हो
भूल गए हमें
और हम तुमसे जोड़ कर मन
सच्चा प्यार कर बैठे
मैंने कहा पगली फ़ोन पर
ऐसी बातें नहीं करते
दिल की बातें केवल आपस मे
आँखों से आँखे जोड़
हाथों से हाथों को जकड
एकांत में ही करते है
वो बोली तो फिर
ठीक से समझाओ न
अरे मौका निकाल
मिलने आ जाओ न
मैंने कहा हाँ ये हुई बात
फिर मैं आता हूँ
तुम को ठीक से समझाता हूँ
पर बताओ लाइन कब किलियर है
यह तो तुम ही बताओगी
और फ़ोन भी अगली बार
तुम ही लगाओगी
अचानक फ़ोन कट गया
वो साला कांटा
अचानक वहाँ आ गया
हमारे दिलों की डोर झटके से तोड़
हमारे प्यार की नैय्या
मज़धार में डुबो
हमारे दिलों में वो
नश्तर की तरह चुभ गया
सब गुड गोबर कर गया
काश भगवान कांटे न बनाता
तो उसका क्या बिगड़ जाता
और हम जैसों का जीवन धन्य हो जाता
(समाप्त )
बहुत ही सुन्दर श्रीवास्तवजी..बधाई..
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