कलमी आमों का बड़ा बाग था उसे सबलोग
हजारा बाग के नाम से जानते थे उसमे हजार
से ऊपर हीआम के पेड़ होंगें एक शाम हम
तीन मित्र टहलते टहलते उधर ही निकलगये
हम तीनों गवर्नमेंट स्कूल में कक्षा 6 के
छात्र थे तभी हमारे मास्टर पाण्डे जी दिखाई
पड़े जो लोटा लेकर दिशा मैदान को निकले
थे हमें देखते ही उन्होंने हमें इशारे से पास
बुलाया और कहा कि हम उनके घर अचार
बनाने के लिये कुछ आम तोड़कर लेते आवें
हम तीनों मित्र बाग़ के पास पहुँचे तो देखा 3
हम तीनों मित्र बाग़ के पास पहुँचे तो देखा 3
आदमी बाउंड्री के बाहर एक पेंडसेआम तोड़
रहें थे हम तीनों भी पास के दूसरे पेड़ से
आम तोड़ने लगे हमें ऐसा करते देख
वे आदमी चिल्लाये अरे आम क्यों तोड़ रहे
हो हमने कहा कि आप लोग भी तो आम
तोड़ रहे हो वे सब हमारे पास आकर
बोले चलो मालिक के पास हम लोग बोले
चलो मालिक के पास वोह लोग हमें लेकर
बाग़ के अन्दर बने एक कमरे में ले गये
बाग़ के अन्दर बने एक कमरे में ले गये
और वहाँ बैठे व्यक्ति से कहा मालिकये लोग
हमारे पेड़ से आम तोड़ रहे थे हमने तपाक
से कहा मालिक ये लोग भी तो आम तोड़
रहे थे देखिये पूरी बोरी भर कर आम
तोडा है इन्होने
वोह व्यक्ति मुस्कराया और हमसे बोला ये
वोह व्यक्ति मुस्कराया और हमसे बोला ये
तीनों तो हमारे आदमी हैं औरहमारे कहने से
आम तोड़ रहे थे पर आप लोग तो चोरी कर
रहे थे अब चौकानेकी बारी हमारी थी हम डर
के मारे कांपने औररोने लगेतब उस व्यक्ति ने
हमें बुलाया और हमारे पिता और परिवार के
हमें बुलाया और हमारे पिता और परिवार के
बारे जानकारी ली जब हमने पिता जी का
नाम बताया तो उन्होंने कहा कि वोह हम
तीनो के पिताओं और परिवारों से परिचित
है और हम सम्मानित परिवारों से थे हम डर
रहे थे कि घर पर अगर शिकायत गयी
तो डाट भी पड़ेगी और पिटाई भी उस व्यक्ति
ने हमें समझायाजो हम कर रहे थे वोह चोरी
थी और हमें येह शोभा नहीं देती फिर उन्होंने
कहा आम किस लिये चाहिये थे हमने
मास्टरजी की बात बतायी उसी समय
दूरमास्टरजी जाते दिखाई दिये हमने उनकी
ओर इशारा किया उस व्यक्ति ने अपने
आदमियों को भेज मास्टर जी को पकड़
बुलाया और आने पर बहुत फटकारा बच्चों
को चोरी करना सिखाते हो शर्म नहीं आती
मास्टर जी बहुतशर्मिंदा हुवे खैर उसने उन्हें
जाने को कहा और हमारे सिर पर हाथ फेर
कर बोला आम चाहिये तो सीधा अन्दर
आकर बोलो वादा करो आज के बाद ऐसी
हरकत नहीं करोगे नहीं तो सख्ती से
हरकत नहीं करोगे नहीं तो सख्ती से
निपटूंगा और घर पर शिकायत भी जायेगी
हमने कान पकड़ कर माफ़ी माँगी और आगे
हमने कान पकड़ कर माफ़ी माँगी और आगे
यह गल्ती न दोहराने का वादा किया उन्होंने
अपने आदमियों के साथ हमें हमारे घर
भिजवा दिया आज भीजब वोह घटना याद
आती है हमारा मन उन व्यक्ति के लिये श्रद्धा
और सम्मान से भर उठता है
(समाप्त )
(समाप्त )
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