Saturday, 8 November 2014

लघुकथा : कन्ने ठस

बात  हमारे बचपन   की     है    लगभग  55 से 60 
वर्ष पूर्व  हमारे  मोहल्लेमें करीब    50 -55 वर्षीया 
पागल औरत   अक्सर ही   आती    थी फटे पुराने
चीथड़े लपेटे चीखती चिल्लाती गालियाँ      बकती ..
.. मोहल्ले के सभी बच्चे  उसे "कन्ने ठस "..........
.... "कन्ने ठस " चिढाते   और  वोह पूरे  जोश    से
गालियाँ बकती  उन बच्चोँ के पीछे पत्थर    लेकर
दौड़ती  लाठी फ़ेक करमारती  हमें भी यह   शगल 
बहुत अच्छा लगता था और हम उसकी प्रतीक्षामें
 रहते ,वोह   दिखी नहीं   कि बच्चे शुरू   और वही 
सीन दोहराया जाता  मुझेउस पर बहुत दया आती 
थी और घर से कुछ   खाने का सामान लाकर उसे
अवश्य देता  उसकी   आँखों की    कातरता   और
 करुणा मुझे बहुत प्रभावित करती थी

एक बार वोह करीब 4 दिन   नहीं आयी        शायद 
बीमार थी  जब आयी    तो कमजोर   दिख रही  थी 
दिखते ही बच्चे   शुरू हो गये  पर वोह न तो    ठीक
से गाली दे पा रही थी न   दौड़ पा   रही    थी    कुछ 
लंगड़ा रही थी जब बड़े लोगोंने यह देखा तो   बच्चों
को डाटा और समझाया कि हम उसे परेशान न करें
उस औरत को वे मोहल्ले के बाहर छोड़ आये और
उसे दुबारा आने से  मना किया

तीन चार दिन वोह   नहीं आयी बच्चों  में उसके न 
आने से बहुत बेचैनी थीपर बड़ों का  पहरा और डर 
भी था  अतः जब वोह आयी सभी    बच्चे छुप कर
इधर उधर से उसे देख   रहेथे  पर बड़े    लोग   भी 
निगरानी रख रहें हैं   यह हम    जानते भी थे और
देख भी रहे थे  उन लोगों ने इशारे से हमें मना भी
किया  और ऑंखें भी तरेरी    हम सब बच्चे   चुप
घनघोर सन्नाटा .......उस   औरत  ने इधर  उधर
देखा  कहीं कोई   नहीं  थोडा आगे बढ़    कर बीच
चौराहेपर आ खड़ी हुई  उसके   लिये ये हैरत और
शायद संशय के छड थे  औरहमारे लिये सब्र और
स्वयं   पर   काबू   रखने   के    फिर     अचानक 
चिरपरिचित    अंदाज   में    चिल्लाई  सब साले 
दहिजार *  आज कहाँ  मर गये    कोई नहीं बोल
रहा"कन्ने ठस " अरे बोलो न  हिम्मत है तो बोलो…  
वोह चैलेंज दे रही थी


बस हमारे सब्र का बाँध टूट गया  सभी बच्चों का
गगनभेदी शोर  कन्ने ठसकन्ने ठस    गूँज  उठा 
वोह औरत पत्थर उठा कर   गलियाँ बकते  दौड़
रही थी  हम सब भी उसे घेर   कर जी     भरकर 
उसे चिढ़ा रहे थे  शायद इतने   दिन   की   कसर
पूरी कर रहे थे

बड़े लोग सब मुस्कराते  हुये इधर उधर हो गये
शायद वोह हमारा आपसी  प्यार समझ गये थे
और यह भी कि हम एक दूसरे की जरूरत बन 
गये हैं

नोट :-
बहुत बाद में  पता चला कि   उसके एक   लड़की
मरी हुई पैदा हुई थी फिर दूसरीसंतान नहीं    हुई
इसका उसके मन मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव हुआ 
और वोहपागल हो गई  पर बच्चो से उसे  हमेशा
प्यार रहा


(समाप्त )

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