
बादशाह अकबर की फ़ौज में अच्छे लाल
नाम का एक बहुत योग्य और बुद्धिमान
मुंशी था वोह शरीर से काफी दुबला पतला नाम का एक बहुत योग्य और बुद्धिमान
नाम का एक मुग़ल सरदार था जो
विशाल कद काठी का और बहुत शक्तिशाली
था एक बार पहिले वेतन को लेकर उसका
मुन्शी से झगड़ा हो गया गुस्से में दिलावर
खान ने अच्छे लाल को पीट दिया अच्छे लाल
खान से बदला लेने की धमकी दी दिलावर खान
पन्ना फाड़ा और नया पन्ना लगा कर हुलिया
उसका हुलिया बही खाते में दर्ज हुलिये से मिलाया
उन्होंने ताली बजाकर सैनिकोँ को बुलाया और
ही नहीं मिलता था अतः उसे जासूस करार देकर
जासूस से कुछ भी सुनने को तैयार नहीं था
मौत की सजा से पहली रात मुंशी अच्छे लाल
पहिले कोषाध्यक्ष के साथ दिलावर खान से मिलने
कारागार पहुँचा और उसका हाल पूँछा बेतरह रोते
दिलावर खान ने मुँशी से अपने किये की माफ़ी
मांगी और अपनी जान बचाने की फरियाद की अब
उसे कलम की ताकत का एहसास हो गया था
मुंशी अच्छे लाल ने उसे दिलासा दिया और
जाकर काजी साहब को पूरा किस्सा बताया
जाकर काजी साहब को पूरा किस्सा बताया
और दिलावर खान को छोड़ने की विनती की
क़ाज़ी उनके साथ आये और नए मुंशी व्
कोषाध्यक्ष को सब बात बताई और फिर से
दिलावर खान का हुलिया नए पन्ने पर दर्ज
करवा के उसे इस चेतावनी के साथ छोड़ा
कोषाध्यक्ष को सब बात बताई और फिर से
दिलावर खान का हुलिया नए पन्ने पर दर्ज
करवा के उसे इस चेतावनी के साथ छोड़ा
कि आगे से वोह किसी राज कर्मचारी पर
अपने बल का अनुचित प्रयोग नहीं करेगा
अपने बल का अनुचित प्रयोग नहीं करेगा
और मुंशी जी से अपने सामने माफ़ी मंगवाई
इस प्रकार अपनी बुद्धि के बल पर उसने
दिलावर खान से बदला ले लिया और कलम
की तलवार पर श्रेष्टता सिद्ध कर दी
की तलवार पर श्रेष्टता सिद्ध कर दी
(समाप्त)
शिक्षा :
बुद्धि बल पशुबल से सदा श्रेष्ट हैयदि उसका
बुद्धि बल पशुबल से सदा श्रेष्ट हैयदि उसका
सही ढंग से प्रयोग किया जाये
अखिलेश चन्द्र श्रीवास्तव
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