Saturday, 8 November 2014

सोंच विचार : हम और हमारा राष्ट्रिय गौरव

आज का    सोंच विचार    हमारे राष्ट्रिय    गौरव 
सम्मान हमारी     देशभक्ति पर आत्म विवेचन
हेतु है किसी भी   देश में     जो चीजें महत्वपूर्ण
होतीं है  उनपर    हम चिंता     करेंगे कि आदर्श
रूप में क्या होना   चाहिये   क्या  हो रहा है और
क्या    करने     की      आवश्कता    है  वे चीजें
है हमारी  मातृभूमि     हमारी राजभाषा हमारा
राष्ट्रध्वज   हमारा      राष्ट्रगीत    हमारी नदियाँ
पर्यावरण    खेती   रोजगार     स्वास्थ्य शिक्षा
आदि आदि क्या    ये सारी बातें केवल सरकार
की जिम्मेदारी है या हमारी भी कोई भागीदारी
होनी   चाहिये आइये एक    एक  कर इन   पर
विचार करें :-

शायद ही किसी को  कोई भ्रम होगा की  हमारी
राष्ट्र्भूमि हमारी माँ के सामान पूजनीय है यह
हमें  पालती  पोस्ती और बड़ा   करती है  अतः
राष्ट्रभक्ति हमारा केवल कर्तव्य ही  नहीं हमारा
धर्म होना चाहिये और   इसके   सम्मान    पर 
मर मिटने  का जज्बा  हमारे अन्दर होना   ही 
चाहिये हमारा राष्ट्रगीत और   राष्ट्रध्वज हमारी
आन बान और शान हैं  उनकेसम्मान के लिये
कुछ भी कर गुजरने को हमें  तैयार रहना   ही 
चाहिये उनको   पूरा   पूरा सम्मान दियाजाना 
चाहिये हमारी राष्ट्रभाषा जो बड़े छेत्र की  भाषा
है और संस्कृत भाषा  जनित अन्य  भारतीय
भाषाओँ की बड़ी     बहन जैसी है अतः  उनसे
स्वाभाविक स्नेह करती  है     का विरोध नहीं
होना चाहिये जहाँ   राज्यों में   उनकी   अपनी
भाषा को महत्व   दिया जाना    चाहिये संपर्क
भाषा  के रूप में   मात्रभाषा हिंदी   का   प्रयोग
किया जानाचाहिये उसका प्रयोग गर्व में  साथ
करना चाहिये हमें अंग्रेजी   भाषा  भी  अवश्य
पढाना चाहिये क्योकि अंतर राष्ट्रिय    सन्दर्भ
में उसका बड़ा  महत्व है   और मजेदार   बात
यह है की हिंदी औरअंग्रेजी का कोई अंतर्द्वंद है
ही नहीं  दोनों   के   अपने   अपने   महत्व   है 
इस   पर राज नीति नहीं होनी चाहिये जो देश
के   कुछ राज्यों में  मुखर  है पर हमारी   एक
राष्ट्रभाषा जो संपर्क  भाषा     भी   हो होनी ही 
चाहिये यह किसी   देश के लिये  सम्मान की
बात होती   है  खेती और रोजगार पर पर्याप्त
ध्यान दिया जाना   चाहिये जिससे लोगों का
पेट भरे और वे   खुशहाल हों   इन   बातो पर
सोंच विचार बहुत जरूरी   है  और   इसे   हर
स्तर पर करना राष्ट्रहित मे  होगा

(समाप्त )

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