तुम कहीं नहीं हो .....
तुम्हारी मृत्यु हो चुकी है .....
मुझे भी
ऐसा ही लगता है ...क्योंकि
तुम दिखाई तो नहीं पड़ती ......
न घर में न बाहर न कहीं और ...
पर.…………… मुझे क्यूँ
लगता है कि
तुम यहीं कहीं
हो…. मेरे पास हो
मुझे महसूस होती हो ...
मेरे तन ..मन .में समाई हो ..
मेरे रोम .रोम ..में बसी ..हो
हाँ दिखती नहीं हो ...
क्योँकि कि . . तुम
मेरे विचारों में हो
हवा की मानिंद
महसूस करने लायक ..
अपनी तमाम
खुश्बुओं के साथ ...
मैं तुमसे अपने को
जुदा नहीं पाता ..
मैं तुमसे अपने को
जुड़ा हुवा पाता
हमेशा तुम्हारे
ख्यालों में रहता हूँ ..
तुम्हारी यादों में
डूबा रहता हूँ ..
तुम्हारी अच्छी बुरी ....
यादें याद आती हैं ..
तुम्हारी बातें
याद आती हैं
हमने जो पल
साथ जिये थे ..
ज़िन्दगी के रास्तों पर
साथ साथ चले थे
वो .. .वो सब
यादें याद आतीं हैं ...
तुमने जो छोड़ी है
धरोहर ..तीन लड़कियां
वो प्यारी प्यारी ..
आज भी मैं
उन्हें सहेजता हूँ ...
प्यार करता हूँ उन्हें ....
और उन्हें प्यार देता हूँ ..
मैं अक्सर ये कहता हूँ ...
कि मैं miopic हूँ ...
अपने को प्यार करता हूँ ....
अपनी लड़कियों को
प्यार करता हूँ .
उनके परिवारों को
प्यार करता हूँ
और यदि कुछ बचा ....
तो फिर सारे समाज ...
दुनिया .. को
प्यार करता हूँ ..
मेरे लिए अनमोल हैं
ये लडकियाँ ....
क्योंकि तुम्हारी देन ...
है ये लडकियाँ ..
इनके सहारे
तुम्हारी यादें ..जीता हूँ ..
और तुम्हारे विछोह के
कडुवे घूँट पीता हूँ ..
सब कहते हैं कि
तुम नहीं हो ....
कहीं ....नहीं हो .. पर ..
मैं सदा अपने आसपास
तुम्हे पाता हूँ . .और ..
ख्यालों में ही सही ....
तुम्हारे साथ जीता हूँ ....
तुम्हारे साथ जीता हूँ
बस तुम्हारे साथ जीता हूँ ..
क्यों कि तुम पास हो
मेरे हमेशा . .हमेशा
(समाप्त)
विशेष नोट :-
मेरी दिवंगत पत्नी की यादोँ
को समर्पित है यह कविता
यादों के थाल मे भरकर पलों के मोती
ReplyDeleteअर्पित कर दिया तूने चाके दिल अपना
वाह भाई क्या बात है अच्छी कविता के लिये बधाई