खड़ा था ..सवारी की आस में .....
तांगा पंहुचा पास ...में ...
घोडा थका ...थका ...सा ...
तांगा ..रुका ...रुका ...सा ..
लाचारी .....बेचारी थी ...
बोझ ....और ...बेजारी थी ...
लगातार ...पीटता ...मालिक था
गर्मी थी ट्राफिक ..था ..सिपाही था ..
घोड़े से… .....आँख मिली .....
ममता .......हृदय मे बही ...
आँखों में (घोड़े की )..सूनापन था ..
घोडा क्यूँ बना ...इसका ..गम था ..
प्यास से गला सूखा था ...
पेट ....बहुत भूखा था ...
मालिक की ....चाबुक थी ..
बेतहाशा .....पड़ती मार थी ...
घोडा हिनहिनाया ....
रुका .....लहराया ......
गिरा जमीन पर बेदम ...
निकल गया ...उसका दम ...
और अब ....रो रहा है ताँगेवाला ..
उसे अपने परिवार .....
और उसकी रोटी की पड़ी थी ...
मेरे सामने घोड़े की लाश पड़ी थी ....
मेरे मन में बेजुबान जानवर के प्रति ...
ममता उमड़ी थी ...श्रध्दा उमड़ी थी ..
पर ....पर ..घोड़ेवाले के प्रति भी ...
नफ़रत नहीं थी ...नफ़रत नहीं थी ..
कहीं ...न ...कहीं उसकी
बेचारगी का एह्सास था ..
कल से बेचारा क्या खायेगा ...
इस ..सोंच का भास था ..
इतने में ...मेरा वाहन आ गया
और मैं चढ़ कर अपनी
मंज़िल पर .....आ गया ..
घोड़े की लाश ....और ...
रोते तांगेवाले से .दूर आ गया ...
पर ....न भुला सका मैं ....वो मंज़र ...
आज भी दिल पर चलतें हैं खंज़र ...
कब ..हम जानवरों को न्याय दे पायेंगे ..
कब ..हम उन्हें प्यार करना ..सीख पायेंगे ..
कब न तोड़ेगा कोई घोडा ...
इस तरह से दम .......
कब इस पर ...विचार करेंगें हम ....
कब हम दया भाव से जीना ...सीखेंगे ..
कब हम ईश्वरीय सन्देश समझेंगे ...
कब हम उन पर आचरण करेंगे ...
ये सब विचार की बात है ...
वर्ना ....घोड़े यूँ ही ...मरते रहेंगें ...
और ...तांगेवाले ...रोते रहेंगें
बस ....रोते रहेंगें .....
(समाप्त) सभी जीवधारी ईश्वर की रचना हैं उनकी देखभाल
तथा सेवा इश्वेर की सेवा है और हमारा कर्त्तव्य भी ........
बहुत हृदयस्पर्शी शब्द चित्रण है वैसे तो हम सब समय रूपी
ReplyDeleteतांगे मे जुते है हमारा कोचवान भी भौतिक जगत के नियमो की मजबूरी मे हमे जोते जा रहा है बिना हमारी पीड़ाओ पर धयान दिये हुए जैसे यह घोडा निरीह है बैसे प्रत्येक जीवन
को दया रूपी मलहम की आवश्यकता है जिसे लगाने से ईश्वर की सच्ची सेवा हो सकती है