आसमान में चाँद है
और है ठंडी ठंडी चाँदनी
आगोश में मेरे सोयी तू
ओढ़कर झीनी ओढ़नी
मीठे मीठे ख्वाबों में खोयी
शबाब की शराब से तर बतर
तेरी कातिल जवानी की चाशनी
इधर मदमस्त मैं उधर नादान तू
खुदा खैर करे
ये रात खैरियत से
गुजर भी जाये
और क़यामत से पाहिले
क़यामत न आये
होगी कोई रात भी क्या
कभी इससे भी ज्यादा हसीँ
नज़ारे न जाने
कब कैसे हमें खुदा दिखाये
खुदा खैर करे
खुदा खैर करे
जब चाँद के मुकाबिल है तू
(समाप्त)
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