Friday, 7 November 2014

कविता : लड़की पर एसिड अटैक

लड़के  का एकतरफा      प्यार ...
लड़की के घर के .....चक्कर हजार
मनुहार ...प्यार का   इज़हार
लड़की का ....इन्कार ....                    

लड़के का  फिर ..फिर इज़हार ...
एकतरफा प्यार  का बढ़ता बुखार ..
लड़की की बेरुखी ..और फिर इन्कार
लड़के के पागलपन ..दीवानापन ...
एकतरफा प्यार में इज़ाफा ...बेशुमार ..
लड़की का  किसी और  से प्यार ....
लड़के पर गुस्से का ..बुखार ..
फिर से ...मनुहार ...न मानी ..तो
धमकाना और तकरार ...
फिर भी   न मानी ...तो ..
एसिड से प्रहार .........
लड़की का चेहरा और शरीर बेकार ..


ये तमाम स्टेज ज् हैं ..........
आज  के .... एकतरफा प्यार के ..
वे बेधड़क .....बेख़ौफ़ ...
अक्सर बड़े बाप की आवारा औलाद ...
ताकत के ..पैसे के ..बाप के रसूख ..के
मद में मस्त ....दुनिया अपनी जूती पर ..
क्योकि उन्हें लगता है कि कानून .....
उनके सामने बौना है ..और पुलिस लाचार ..
वे  खेल समझतें है ..कर के ये अत्याचार .

पर बेचारी लड़की असह्य दर्द सहती है ..
उसके चेहरे और शरीर के साथ साथ ...
उसका पूरा अस्तित्व ...उसका मन .......
घायल हो जाता है जीवन तथा भविष्य तक
जल जाता है नष्ट हो जाता है ...
असह्य दर्द सहती ..छट पटाती ..
चेहरे और शरीर के घाव छिपाती ..
वोह सोंचती है क्या था कुसूर उसका ....?
उसे  सजा मिली .किस बात की ..?.

फिर होता है पुलिस थाना ..
कोर्ट कचेहरी ...गवाहियाँ ..
धमकियाँ ...टूटते गवाह ...
बिखरते सबूत बहस मुबाहसा ..
बरसों बरस चलते मुक़दमे ..
बहुत सारे केसेस में कुछ नहीं ..होता
क्योकि सबूत गवाह कम पड़ जाते हैं ..
अपराधी अपने रसूख पैसे या ताकत के
बल पर साफ़ छूट जाते है ..और सब के
पास इतने पैसे ..संसाधन नहीं होते ..
कि हमारी अदालतों में जिन्दगी भर लड़ें ..
 निचली अदालत से किसी प्रकार जीत भी गये ..
तो और भी स्टेज ज् है  अपराध और  सजा के बीच ..
उबकर या दबाव में या हिम्मत  हारकर चुप ..
बैठनेको मजबूर होते हैं  और किस्मत पर रोते हैं ..

लड़की कोसती है अपनी जिन्दगी ....
घरवाले  उसको और उसकी जिन्दगी ..
 रोते बिसूरते .कटती है उसकी जिन्दगी .
एक आनिश्चित भविष्य के साथ ..
और लड़का वैसे ही मस्त शाही ..अंदाज़ मैं
जिन्दगी जीता है .     .अपने कारनामे का ...
शान से बखान करता ..     शान के साथ ..


पर प्रशन है क्या यह सही है ...?
क्या हमारा तटस्थ रहना सही है ?
क्या सामाजिक स्तर पर हम
 कुछ कर सकतें हैं ...?
क्या जनमत बन सकता है ?
उस अपराधी के विरुध्ध ...
क्योकि वोह लड़की आपकी
 बेटी भी हो सकती है बहन भी
नातिन भी और पोती भी ...अतः
अ संलिप्त मत रहिये ..जागिये .
कुछ करिये वर्ना आप इन्हें
केवल एसिड से  ही नहीं ...
अन्य अपराधों जैसे बलात्कार ..
दहेज़ हत्या .....छेड़ छाड़ से भी ..
नहीं बचा पायेगें ...नहीं बचा पायेंगे
नहीं बचा पायेंगे ...


(समाप्त )अपराध कही भी हो उसका सशक्त विरोध होना चाहिये
यदि पास पड़ोस में किसी भी लड़की ..महिला पर जुल्म अत्याचार
हो रहा है तो आलिप्त मत रहिये वोह भी किसी न किसी की बेटी बहन
नातिन या पोती हो सकती है , और यदि आप चाहतें हैं कि आप की लड़की
की उसके पडोसी मदद करें तो आप भी अपने पड़ोस में सजग रहें और
 समय रहतें उचित कार्यवाही करें .
...


1 comment:

  1. बहुत ही सही और भावनापूर्ण चित्रण है. बधाई

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