अक्सर ऐसा होता है …
कि पौधे काटने छाटने के बाद ….
और … जोश से बढ़ते … हैं
फलते …फूलतें और हरियाते हैं …
और यदि न काटा जाये तो
उनकी बाढ़ रुक जाती है
बुढा जाते हैं असमय
फल फूल भी उन पर नहीं लगते
लगतें भी हैं तो बहुत कम और
वोह भी मरे …… मरे
यह साबित करता है ………
कि यदि अपनी अदम्य इच्छा
जीने की हो … …तो ……
कोई ताकत हमें
जीने से रोक नहीं सकती
हमारा जोश व् तरक्की
रोक नहीं सकती
हमारी जीवन शक्ति अजेय है …………
जिन बच्चों में पढने की
आगे बढ़ने की .. इच्छा होती है ……………
पढतें हैं तमाम असुविधाओं और
काट छाँट के बावजूद ……
प्रतिभाएँ सदैव जन्म नहीं लेती
केवल अमीरों के घर
सुख सुविधा साधन ………….
हो सकतें हैं पर साध्य नहीं ...
कबीर तुलसी रैदास ……….
जिये और मरे गरीबी में …….
पर कौन रोक पाया
उनकी उन्नति ……
आगे बढ़ने की चाह
और भावना
अतः दबना नहीं है
दबाने से …….
मरना नहीं है केवल
मार खाने से …
कट के भी आगे
बढ़ना सीखो
उखड के भी
जमना सीखो …….
कुछ तो सीखो तुम
झाड़ से पौधों से …
कुछ तो बनो
अपनी प्रतिभा से
हिम्मत से ………
मुसीबतों को आना है तो
वे जरूर आयेंगी
और अपने साथ तमाम
तकलीफें भी लायेंगी
उनसे जो जूझ सकते हैं
वोहि बहादुर हैं
उसी बहादुर को
जीने का हक़ है
जीने का हक़ है …….
केवल उसे ही
जीने का हक़ है
(समाप्त )
प्रतिभा विपरीत परिस्थितियों में भी
जीने की आगे बढ़ने की राह खोज
लेती है और बहादुर लोग अपनी
मंजिल पर अवश्य पहुँचते हैं
हमारे पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री लाल
बहादुर शास्त्री जी का बचपन बहुत
कठनाइयों और चुनौतियों से भरा था
फिर भी उनकी उन्नति कोई रोक पाया
और अपने अदम्य साहस और काम से
देश के यशस्वी प्रधानमंत्री बने और
1962 की चीन से पराजय से दुखी और
आहत देश को सन 1965 में पाकिस्तान
पर अभूतपूर्व विजय दिलाकर देश का
मान बढ़ायाऔर देश को गर्वान्वित किया
कि पौधे काटने छाटने के बाद ….
और … जोश से बढ़ते … हैं
फलते …फूलतें और हरियाते हैं …
और यदि न काटा जाये तो
उनकी बाढ़ रुक जाती है
बुढा जाते हैं असमय
फल फूल भी उन पर नहीं लगते
लगतें भी हैं तो बहुत कम और
वोह भी मरे …… मरे
यह साबित करता है ………
कि यदि अपनी अदम्य इच्छा
जीने की हो … …तो ……
कोई ताकत हमें
जीने से रोक नहीं सकती
हमारा जोश व् तरक्की
रोक नहीं सकती
हमारी जीवन शक्ति अजेय है …………
जिन बच्चों में पढने की
आगे बढ़ने की .. इच्छा होती है ……………
पढतें हैं तमाम असुविधाओं और
काट छाँट के बावजूद ……
प्रतिभाएँ सदैव जन्म नहीं लेती
केवल अमीरों के घर
सुख सुविधा साधन ………….
हो सकतें हैं पर साध्य नहीं ...
कबीर तुलसी रैदास ……….
जिये और मरे गरीबी में …….
पर कौन रोक पाया
उनकी उन्नति ……
आगे बढ़ने की चाह
और भावना
अतः दबना नहीं है
दबाने से …….
मरना नहीं है केवल
मार खाने से …
कट के भी आगे
बढ़ना सीखो
उखड के भी
जमना सीखो …….
कुछ तो सीखो तुम
झाड़ से पौधों से …
कुछ तो बनो
अपनी प्रतिभा से
हिम्मत से ………
मुसीबतों को आना है तो
वे जरूर आयेंगी
और अपने साथ तमाम
तकलीफें भी लायेंगी
उनसे जो जूझ सकते हैं
वोहि बहादुर हैं
उसी बहादुर को
जीने का हक़ है
जीने का हक़ है …….
केवल उसे ही
जीने का हक़ है
(समाप्त )
प्रतिभा विपरीत परिस्थितियों में भी
जीने की आगे बढ़ने की राह खोज
लेती है और बहादुर लोग अपनी
मंजिल पर अवश्य पहुँचते हैं
हमारे पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री लाल
बहादुर शास्त्री जी का बचपन बहुत
कठनाइयों और चुनौतियों से भरा था
फिर भी उनकी उन्नति कोई रोक पाया
और अपने अदम्य साहस और काम से
देश के यशस्वी प्रधानमंत्री बने और
1962 की चीन से पराजय से दुखी और
आहत देश को सन 1965 में पाकिस्तान
पर अभूतपूर्व विजय दिलाकर देश का
मान बढ़ायाऔर देश को गर्वान्वित किया
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