Thursday, 27 November 2014

कविता :जागो भक्तों जागो

क्या      करें      हम      ऐसे    संतो    का
जिनके        भक्त         हैं       करोड़ों   में
जिनकी   ख्यति   है    आसमान      तक
जिनके    पास     है       अकूत         धन
जिनके  पास   है   हर प्रकार    की  शक्ति
इस     असीम    शक्ति        ने       उनकी
बुध्धि      की         भ्रष्ट          और      वे
भटक          गये             सन्मार्ग       से
करने     लगे    भ्रष्टाचार    व   व्यभिचार
दुराचार धन  और  बल    का    दुरपयोग
जब   भेद    खुला    भक्त  हैरान  परेशान
जिसे भगवान   माना वो निकला शैतान
महा घिनोना   दुष्ट   बलात्कारी  बेईमान
अब    ऐसे       संतो     का   क्या       करें
कि वे अपने   दुष्कर्मो  का    फल    भोगें
न्याय   व्   धर्म     का      है    ये तकाजा

कि   देश    की       न्याय व्यवस्था     पर
रखकर भरोसा उसे करनें दें  अपना काम
बिना   किसी  रोकटोक  या   रुकावट बने
शायद      ये     ही     मानवता          और
देश    की   सही   सेवा     होगी          और
सच    और  झूठ   की    भी  पहचान होगी
यदि     संत जी      निर्दोष       सिद्ध  होंगे
 तो      वो      साफ़      बच            जायेंगे
और       यदि      दोषी        पाये        गये 
तो      अपने    कर्मों  की   सजा     पायेंगे
अतः आवश्यकता इस बात की है कि हम
अपनी न्यायपालिका     पर भरोसा रक्खें
इस             देश के       संविधान      और
परमपिता     पर    भरोसा              रक्खें

आइये        हम    अपने      देश          के
जागरूक                        नगरिक      बन
इस     महान    देश       की        सेवा करें
मातृभूमि        का       ऋण        अदा करें
मातृभूमि      का         ऋण        अदा करें

(समाप्त)

विशेष नोट :-
ऊपर दी हुयी छवि सांकेतिक है और नेट  से
ली गयी है किसी जीवित या मृत व्यक्ति से
उसका कोई रिश्ता नहीं है

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