करनी थी दिल की बात जब
हिम्मत और शब्द कम पड़ गए
जब कि दिल का इशारा भी था
और दोनों रूहों की चाहत भी
आँखों में था प्यार का सैलाब
दिलों की बढ़ी हुई धड़कने
थामें हाथों में हाथ हौले से
बेतरतीब साँसे सब कुछ तो
कह रही थी दिलों की बात जो
दिलों में उनके बीच चल रहीं थी
सिर्फ रूहें ही सुन रही थीं
तुम्हे चाहता हूँ
बहुत प्यार करता हूँ
तुम्हे अपना बनाना चाहता हूँ
तुम्हे अपनाने के लिये
तुमसे शादी रचाना चाहता हूँ
यह सारे शब्द थे ज़ेहन में
पर बहुत छोटे
और ओछे लग रहे थे
जब दिलों की चल रही थी बात
और रूहें सुन रहीं थी
तमाम कायनात खुश थी
आसमान में चाँद मुस्करा रहा था
तारे खुश खुश टिमटिमा रहे थे
तो चमेली के मंडवे तले मै
कहता तो क्या कहता
शब्द सोंचे हुवे कहीं
बौने हो गये खो गये
और दिल की बात करने को
हिम्मत और शब्द कम पड़ गये
(समाप्त )
होंठों पे एसी बात मै तो यूंही दबा के रह गया
ReplyDeleteखुल जाय कोई राज हाय रब्बा क्या कह गया
बधाई