दिल अगर माँ है .....
तो .... दिमाग पिता है .
आत्मा है .. ..विचार ...
इन तीनों का संगम होता है ...
तो… तो कविता जन्म लेती है ...
दिल मह्सूस करता है ......
दिमाग उस पर
गहराई से सोंचता है ...
तब विचार आते हैं
घनीभूत होते हैं .....
और . ..कविता ... जन्म लेती है ....
दिल का संवेदन शील होना ....
दिमाग की सही सोंच
उसका ..साफ़ सुथरा होना ......
तब उत्तम विचार आतें हैं ..
और उत्कृष्ट कविता जन्म लेती है ..
कविता कभी ..बनाई नहीं जाती ......
ज़बर्दस्ती सुर ताल से
जब सजाई नही जाती ..
तो वोह कविता ..बेहतर होती ...है
क्योकि वोह सीधे कवि के
दिल से जन्म लेती है
और जो कविता दिल से निकलती है
तमाम दिलोँ पर असर करती है
मैं हँस ....देता हूँ ...जब कोई ...
मुझे कहता है कि उसने
एक कविता बनाई है .
क्योंकि कोई कविता ......
तो मात्र किसी विचार की
छाया होती है और
उसी से जन्म लेती है ..
अतः कविता को निर्झर बहने दो
उसे अपने ढंग से चलने दो ..
बक्शो उसे मत पहिनाओ ..उसे
मात्राओं की बेड़ियाँ ..
मत बाँधो उसे
पैराग्राफो के घेरे में ...
यूँ ही ...बहने दो निर्झर .......
स्वतंत्र ... ....उन्मुक्त ... ...प्रसन्न
झर .......... झर .. . झर झर
क्योंकि ओरिजिनल
ओरिजिनल होता है
और सिन्थेटिक ........ ..सिन्थेटिक ...
असली का मुक़ाबला ........
नकली कभी नहीं कर सकता .....
फिर वोह फैब्रिक हो
घी हो या कुछ और ..
अतः निवेदन है कि कविता को ....
कविता ही रहने दो ...
दिल . .दिमाग और ...विचार को ..
अपना .अपना काम करने दो ...
ताकि कविता ... .जिये ....
और बन्धनों में घुट घुट कर ...
मर न जाये ....
मर न जाये ....
(समाप्त )
भाव व सन्देश किसी भी कविता की
आत्मा होती है वो सिंथेटिक कविता जो
जबरदस्ती बनाई जाती है वोह निष्प्राण
बेस्वाद और केवल सजावट की वस्तु
होती है वोह दिलो को आंदोलित नहीं कर
सकती क्योकि कविता लिखना कला है
कारीगरी या बाजीगरी नहीं
तो .... दिमाग पिता है .
आत्मा है .. ..विचार ...
इन तीनों का संगम होता है ...
तो… तो कविता जन्म लेती है ...
दिल मह्सूस करता है ......
दिमाग उस पर
गहराई से सोंचता है ...
तब विचार आते हैं
घनीभूत होते हैं .....
और . ..कविता ... जन्म लेती है ....
दिल का संवेदन शील होना ....
दिमाग की सही सोंच
उसका ..साफ़ सुथरा होना ......
तब उत्तम विचार आतें हैं ..
और उत्कृष्ट कविता जन्म लेती है ..
कविता कभी ..बनाई नहीं जाती ......
ज़बर्दस्ती सुर ताल से
जब सजाई नही जाती ..
तो वोह कविता ..बेहतर होती ...है
क्योकि वोह सीधे कवि के
दिल से जन्म लेती है
और जो कविता दिल से निकलती है
तमाम दिलोँ पर असर करती है
मैं हँस ....देता हूँ ...जब कोई ...
मुझे कहता है कि उसने
एक कविता बनाई है .
क्योंकि कोई कविता ......
तो मात्र किसी विचार की
छाया होती है और
उसी से जन्म लेती है ..
अतः कविता को निर्झर बहने दो
उसे अपने ढंग से चलने दो ..
बक्शो उसे मत पहिनाओ ..उसे
मात्राओं की बेड़ियाँ ..
मत बाँधो उसे
पैराग्राफो के घेरे में ...
यूँ ही ...बहने दो निर्झर .......
स्वतंत्र ... ....उन्मुक्त ... ...प्रसन्न
झर .......... झर .. . झर झर
क्योंकि ओरिजिनल
ओरिजिनल होता है
और सिन्थेटिक ........ ..सिन्थेटिक ...
असली का मुक़ाबला ........
नकली कभी नहीं कर सकता .....
फिर वोह फैब्रिक हो
घी हो या कुछ और ..
अतः निवेदन है कि कविता को ....
कविता ही रहने दो ...
दिल . .दिमाग और ...विचार को ..
अपना .अपना काम करने दो ...
ताकि कविता ... .जिये ....
और बन्धनों में घुट घुट कर ...
मर न जाये ....
मर न जाये ....
(समाप्त )
भाव व सन्देश किसी भी कविता की
आत्मा होती है वो सिंथेटिक कविता जो
जबरदस्ती बनाई जाती है वोह निष्प्राण
बेस्वाद और केवल सजावट की वस्तु
होती है वोह दिलो को आंदोलित नहीं कर
सकती क्योकि कविता लिखना कला है
कारीगरी या बाजीगरी नहीं
वियोगी होगा पहला कवि आह से उपजा होगा गान
ReplyDeleteनिकल आँखों से चुपचाप बही होगी कविता अनजान
बधाई