Thursday, 6 November 2014

कविता : कलम और तलवार

इतिहास गवाह है उन तमाम छड़ों  के .....कि .
जब जब कलम और तलवार में हुआ है  टकराव ....
कलम ने तलवारों  की धारों को किया है ..कुन्द ...                
और छाँटी    है ..............अज्ञानो कि धुँध ......
प्रकाशित किया है ...ज्ञान के प्रकाश से ...समस्त विश्व ...


कलम ने उगायी है दिमागों की फसल ...
कलम ने पैदा की है आजादी के दीवानों की नसल ..
कलम ने एकता के बीज बोये हैं
कलम ने निखारी किसी भी जाति .....या धर्म की विशेष चमक ...
कलम की है   अपनी चमक ...अपनी    दमक .......
कलम के आदेश पर .........
अपराधियों  की   गर्दन उतारती है ...........तलवार ..
और ....कलम से .......होते भी  है  .......करार ....
बदलते हैं ............राजे   और राजपरिवार ....


(अतः )   कलम की ताकत ......असीम है ...
कलम को मगर अब अपनी ताक़त पहिचान नी होगी ...
इस देश से अज्ञान ....बेरोज़गारी .........
गरीबी ..की धुँध ........मिटानी होगी

(क्योकि )जब कलम अपनी करनी पर .......आ जायेगी ..
तलवार ... स्वयं .......उसकी रक्षा में ........आ जायेगी ...
तब न रहेगा         अज्ञान .....न ...........अँधेरा ........
निकलेगा ..............तब एक ...........नया सबेरा ....


तब कोई .......नहीं करेगा तुलना ...कलम और तलवार की ..
दोनों तब ....दिखायेंगी जौहर ....अपनी ...अपनी ....और
अपने ..........आपसी  प्यार  की .............समझ की ...
एक सवारेंगी ......विचार ...बनायेगी .........जनमत ...
दूसरी ...सम्भालेगी ......अपराधियों को ...गुनाहगारों को ....


 ( और ) बनाएँगी इसी ..पावन धरा को .
.जन्नत .जन्नत और .....और सिर्फ़ जन्नत
काश ऐसा सम्भव हो पाता .........
तो इस देश का .......बेडा पार ....हो जाता ...

आइये हम इस    ओर .......सघन प्रयास करें ....
और अपनी पावन धरा के .........प्रति ...
अपने कर्त्तव्य का निर्वाह करे .........
अपने कर्त्तव्य का   निर्वाह करें ...


(समाप्त ) कलम  और तलवार ऐसी ताकतें हैं जो हमारे प्यारे देश को दशा
और दिशा दे सकती हैं उसका भला कर सकती हैं ,बशर्ते वे सही हाँथों में हो
और उनका सदुपयोग हो

1 comment:

  1. जब कलम अपनी करनी पर .......आ जायेगी ..
    तलवार ... स्वयं .......उसकी रक्षा में ........आ जायेगी ...
    तब न रहेगा         अज्ञान .....न ...........अँधेरा ........
    निकलेगा ..............तब एक ...........नया सबेरा ...
    वाह भाई वाह क्या खूब लिखा

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