Wednesday, 5 November 2014

कविता : ओ मेरे खुदा

मुझे   तेरी    तलाश       है
तू मेरे दिल   की    आस है              
तू है      कहाँ छुपा     हुआ
मेरी नज़र    की    ओट से
मैं   ढूंढता       फ़िर्रु    तुझे
हर पहर          हर    जगह
नहीं    मिला   कहीं    मुझे
ढूँढा   तुझे       हर   जगह
थकुंगा       पर    न      मैं
ढूनुँगा    तुझे हर     जगह
मिला  मुझे  न     तू  मुझे
न मंदिर में न मस्जिद में
न गुरुद्वारा     न गिरजे में

मिला भी     तू     मुझे खुदा
मिला   तो कुछ    इस तरह
तू       मुस्कराता      मिला
बचपन की   मुस्कराहटों में
खिलते      हुवे       फूलों में
चिड़ियों की चह चहावटो में
मंद        मंद      बयार   में
निष्पाप  दिल के   प्यार में
उगते  सूरज की    लाली में
खेतों   की       हरियाली में
रिमझिम  बरसते पानी में
बहती नदियों की रवानी में
हर       एक पाक   दिल में
बसा       है                   तू
मेरी       जिंदगी         का
आसरा         है            तू
मुझे        तेरी    तलाश है
तू     मेरे दिल की आस है
तू  मेरी  रूह  की प्यास है
मिलेगा    तू    ज़रूर    ही
ये भरोसा और विश्वास है

(समाप्त)

1 comment:

  1. सही तो है वह यहीं है

    'तू       मुस्कराता      मिला
    बचपन की   मुस्कराहटों में
    खिलते      हुवे       फूलों में
    चिड़ियों की चह चहावटो

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