mनमस्कार मित्रों
आज चंद हायकू "प्रकृति" की प्रकृति पर...
1) आँधी तूफ़ान
उखाड़ते वृक्षों को
लाते विनाश
2) जलप्लावन
बाढ़ की विभीषिका
पेड़ों पे लोग
3) दावानल से
जलते हैं जंगल
निगले आग
4) आया भूडोल
बिगाड़ा है भूगोल
पृथ्वी पर
5) उगा भास्कर
रक्तिम हुवा नभ
कोयल बोली
6) न छेड़ उसे
बख्शती नहीं प्रकृति
ज्यादती कोई
7) धरा सुन्दर
नीलवर्ण आकाश
पालते हमें
(समाप्त)
अखिलेश चंद्र श्रीवास्तव
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नमस्कार मित्रों..
आज के चंद हाइकु "पेड़ो और हरियाली" पर..
पेंड और हरियाली
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1) हरियाली है
तो जीवन संभव
वर्ना विनाश
2) पेंड लगाओ
हैं हमारे ये मित्र
दें प्राणवायु
3) भोजन देते
छाया भी हैं ये देते
कृतघ्न हम
4) शुध्द हो वायु
खुशहाल जिंदगी
दीर्घायु हम
5) निहित स्वार्थ
काटते हम पेंड
मूर्खता वश
6) पेंड लगाओ
जीवन ये बचाओ
प्रदूषण से
(समाप्त)
अखिलेश चंद्र श्रीवास्तव
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कुछ पेड़ों पर..
1) पेंड हैं साथी
जीवन जीने हेतु
उगाओ उन्हें
2) खाने को खाने
पहिनने को वस्त्र
देते हैं पेंड
अखिलेश चंद्र श्रीवास्तव
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नमस्कार मित्रों
आज के हायकू सूरज ...चाँद और सितारों पर..ये वो हैं जो न केवल हमें जीवन प्रदान करते हैं...जीवन जीने में भी सहायक होते है..जाने अनजाने इनकी किरणों से हम सब प्रभावित भी होते ही हैं...पूरा ज्योतिष और खगोल विज्ञान इन्ही के चारो ओर घूमता है..यह विषय चुनकर हायकू मञ्जूषा ने हम सबको एक बड़ा अवसर प्रदान किया है ...अपनी अनुभूतियों को शब्द रूप देने का...
तो श्री गणेश..
सूरज ..चाँद और सितारे
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1) चाँद सितारे
सूरज को ले साथ
बना ब्रम्हांड
2) सूरज केंद्र
चक्कर हैं काटते
सभी नौ गृह
3) तपे सूरज
चंद्रमा है शीतल
प्यार जताये
4) चाँद शर्माए
तारे झिलमिलाए
हुस्न बापर्दा
5) शीतल चाँद
आँगन में महके
रजनी गंधा
6) गिनता तारे
सारी सारी रात मैं
रूठी निंदिया
7) बदली छायी
चाँद की लुका छिपी
मन को भाई
8) तपे सूरज
जेठ की दोपहर
सूनी सड़कें
9) अमृत झरे
रात शरद पूनों
खीर प्रसाद
10) सूरज बिदा
तारों की झिलमिल
दूज का चाँद
(समाप्त)
अखिलेश चंद्र श्रीवास्तव
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नमस्कार मित्रों
अंक 13 के लिये मेरे हाइकु ...दिये गये विषय
पर
1) सुबह शाम
प्रकृति के रंगीन
होते आयाम
2) रात अँधेरी
तारों की है चादर
अकेले हम
3) जाड़ा या गर्मी
छाँव या फिर धूप
हम तुम्हारे
4) अपराह्न हो
या फिर हो मध्यान्ह
साथ हैं हम
5) पतझड़ है
आएगा बसंत भी
रखो उम्मीद
6) रिमझिम है
बारिश का मौसम
कौंधी बिजली
7)ठण्ड का जोर
आग तापते लोग
हैं बतियाते
8)फूल खिलते
तितलियाँ घूमतीं
गाते हैं भौंरे
9) ओस की बूंदे
घास पर चमकें
जैसे हों मोती
10)कोयल कूके
झूमते फूलों बीच
झींगुर गान
11)प्रकृति प्यारी
करती है श्रृंगार
लुभाती मन
12) पतझड़ है
झाड़ गये हैं पात
पेंड उदास
13) तीन पहर
सुबह दोपहर
और है शाम
14)सूरज ऊगा
प्राची की है लालिमा
सुहाना दृश्य
15) डूबता सूर्य
उदासी है फैलाता
छाता अँधेरा
(समाप्त)
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नमस्कार मित्रों
आज 22-10-2016के चंद हाइकु अंक 13 के लिये....दिये गये विषय "प्रकृति के विभिन्न स्वरूपों और आयामों पर"...
1)भोर पहर
उषा छाती लालिमा
लाती खुशियाँ
2) दोपहर की
धूप होती है तेज
लोग बचते
3)डूबता सूर्य
पश्चिमी क्षितिज में
लाता उदासी
4)अँधेरा छाता
लौटे पँछी नीड़ में
अब विश्राम
5)जागते रहें
सारी सारी रात जो
निशाचर वे
6)आते मौसम
जाड़ा गर्मी बारिश
मज़ा सबका
7)छह ऋतुवें
आती हैं क्रमवार
बदले फिज़ा
प्रकृति के अनगिनित रूप और आयाम हैं ...क्रमशः
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