Thursday, 22 September 2016

हाइकु श्रृंखला ..पितृ पक्ष


पितृपक्ष पर
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नमस्कार मित्रों..

पितृपक्ष प्रारम्भ हो गया ..आइये पितरों को याद करें ..कुछ श्रद्धा कुछ प्यार से ...चंद हायकू...इसी पर

पितृपक्ष
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1) करता     याद
        उन्हें जिनसे जन्म
      काया ये मेरी

2) मिले  संस्कार
        आचार व्यवहार
     उनका   नाम

3) पितृ स्वर्ग   में
        हम  धरती पर
    करते     याद

4) पूर्ण श्रद्धा    से
       पूजा पाठ  दान हो
     विधि    विधान

5) पूर्वज       खुश
        मन को होता चैन
     मिले    आशीष

6) बच्चे      देखते
        सीखते बहुत  वे
     देना       आदर

(समाप्त)
अखिलेश चंद्र श्रीवास्तव

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नमस्कार मित्रों..

पितृपक्ष का दूसरा दिन ..आइये करें पुरखों को याद...

1) मुस्कुराते   हो
       माला पड़ी फोटो से
     अभय    मुद्रा

2) तुम्हारा  होना
       दीवार पर   सही
     हिम्मत  देता

3) अगरबत्ती
        धूप दीप  पूजन
     मन को   सुख

4) तुम थे   तो हैं
         हम इस जहाँ  में
     मेरे      पूर्वजों

5) बच्चे      देखते
        सीखते  सब  कुछ
    पूर्वज       पूजा

6) आश्वस्त  हूँ  मैं
       बच्चे  करेंगे   पूजा
     मेरी  फोटो की

(समाप्त)
अखिलेश चंद्र श्रीवास्तव

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नमस्कार मित्रों

आज श्राद्ध पक्ष का तीसरा दिन..पुरखों के ऋण से तो कभी उऋण नहीं हो सकते ...पर उन्हें याद तो कर ही  सकते
हैं..और श्रद्धा सुमन अर्पित कर सकते हैं..

...वही सुमन हाइकु रूप में
प्रस्तुत....

श्रद्धांजलि
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1) आपका    तेज
         पूरा है मुझमें  भी
     अनुग्रहीत..

2)कृपा       रखना
       मुझ अकिंचन   पे
    मेरे         पुरखों

3) धूप    दीप   से
      होती पूजा अर्चना
     पूरी    है     श्रद्धा

4) श्रद्धा         सुमन
       भोग आरती   करूँ
     पुरखों        मेरे

5) आपका    अंश
       वंशज हैं आपके
     कृपा        आकांक्षी

6) धरती       पर
        आपके  प्रतिनिधि
     हो           गुणगान

(समाप्त)

अखिलेश चंद्र श्रीवास्तव

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नमस्कार मित्रों

आज (19 सितंबर 2016 )श्राद्ध पक्ष का चौथा दिन...यादें और..नमन पूर्वजों को..

चंद हायकू...

1) छोड़े     आदर्श
     अनिवार्य   उनका
    करूँ      पालन

2) परिवार   की   
       रखना  मर्यादा ही
    जीवन     धर्म

3) वादा      करता
       मेरे      पूर्वजों  आप
    हों      न  निराश

4) कीर्ति    पताका
      लहराउँ   आपकी
     देना      आशीष

5) अर्चना     पूजा
         भोग आरती करूँ
      नवा   के सिर

6) आपका   वंश
        करूँ  संचालित हो
     के         समर्पित

(समाप्त)

अखिलेश चंद्र श्रीवास्तव

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