[10/11, 08:08] Akhilesh C Srivastava: नमस्कार मित्रों
आज11-10-2016 विजयदशमी का त्यौहार है..सभी को बधाई..आज के हाइकु इसी पर..
1) रामलीला तो
हर वर्ष मनाते
रावण जिन्दा
2)रावण ज्ञानी
परम था प्रतापी
युद्ध वो हारा
3)धर्म राम का
अधर्म रावण का
जीत धर्म की
4)रावण दंभी
मरा मय संबंधी
हुवा विनाश
5)सांकेतिक है
जलाना रावण का
पुतला अब
6)आदर्श भाई
लक्ष्मण औ भरत
राम के प्रिय
7)कष्ट वन के
भोगे सिया लक्ष्मण
राम के साथ
(संमाप्त)
अखिलेश चंद्र श्रीवास्तव
[10/12, 08:24] Akhilesh C Srivastava: नमस्कार मित्रों..
आज 12-10-2016 का दिन है..कल विजयदशमी थी. ..बुराइयों पर अच्छाई की जीत का प्रतीक.. दशहरा...रावण दहन हो चुका है...
आज के हाइकु..इसी पर
1)रावण जला
धर्म की अधर्म पे
विजय हुई
2) परमज्ञानी
शक्तिशाली रावण
धनकुबेर
3) पथभ्रष्ट हो
पापी औ अहंकारी
त्रस्त समाज
4)ऋषि मुनियों
को सताता करता
यज्ञ ध्वस्त वो
5)सभी थे त्रस्त
रावण से थे पस्त
था हाहाकार
6)करने धरा
निर्मूल पापियों से
राम पधारे
कथा लंबी है ..फिर
अखिलेश चंद्र श्रीवास्तव
आपका हाइकु बढ़िया है..पर आदत से मजबूर..
थोड़ा सुधारता हूँ..
होड़ लगी है सभी रावणों में...बनने को रावण..सबसे ऊँचा...पाप पे पाप...लूट अपहरण...रेप औ हत्या...घोटालेबाज
वतन के गद्दार....
इन सबमे
सबसे बड़े...
बड़े से बड़ा बनूँ.
रावण यही
है स्पर्धा..
सब आजाद...सब निर्भीक
किसी को सज़ा नहीं...
कानून कमजोर..
संविधान लचर..
मानवाधिकार अपराधियों के हैं.. आम इंसान के नहीं वे भयभीत हैं या व्यस्त है रोटी कमाने और बाल बच्चे पालने में..इसी लिए निर्भीक ..निर्विघ्न हो सभी रावण ज्यादा से ज्यादा पाप कर.. बड़ा होने की अघोषित प्रतियोगिता में लग अधिकाधिक अनैतिक औरअनर्थ कर रहे है..और बाकि सब लाचार हो के देख रहे है...
मनीष जी..क्षमा करना भाई..सब देखकर चुप भी तो नहीं रहा जाता..
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