नमस्कार मित्रों...
देश सर्वप्रथम है..
उसकी पहिचान है हमारा राष्ट्रध्वज "तिरंगा"..इस तिरंगे की आन बान शान पर कुरान है ..इस देश का हर नागरिक और समय पड़ने पर वोह जान देकर भी इसकी रक्षा को तत्पर रहता है..
इसी राष्ट्रीय झंडे तिरंगे सम्मान में चंद हायकू...
तिरंगा
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कटे ये सर
तिरंगे की शान में
हूँगा गर्वित
लहराये ये
सीना तान सलामी
दें हम सभी
झंडा नहीं ये
हमारी आन बान
देश महान
करिये प्रण
जिम्मेदारी लेते है
रक्षा करेंगे
तिरंगा प्यारा
सुन्दर और न्यारा
छूता आकाश
कटे ये सिर
सामने हो तिरंगा
बात गर्व की
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आज की विशेष प्रस्तुति..स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर.
1) वीर जवान
लेके हँथेली प्राण
सीमा रक्षण
2) गर्मी या सर्दी
मौसम की ख़राबी
सीमा रक्षण
3) युद्ध या शांति
सदा रहें तत्पर
सेना जवान
4) लौह बदन
कोमल हृदय हैं
सीमा रक्षक
5) इन्हें बनायें
अपना भाई और
भेजिये राखी
6) दुवा करिये
कठिन मोर्चे पर
भाई तैनात
7)15 अगस्त
हो जमकर जश्न
मिली आज़ादी
8) तिरंगा प्यारा
आन बान औ शान
गर्व हमारा
9) हैं देशभक्त
हम भारतवासी
वो सर्वोपरि
10) गर्व से कहो
हम भारतवासी
देश से प्यार
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नमस्कार मित्रों..
आज स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर विशेष प्रस्तुति..चंद हायकू..
15अगस्त...
स्वतंत्रता दिवस
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1)जश्ने आजादी
मनायें दिल खोल
लड़ के मिली
2)दिन गुलामी
घुट घुट रहना
जीना हराम
3) देश अपना
ये माँ हम हैं बच्चे
करते प्यार
4) गर्व आँखों में
लहराता तिरंगा
हमारा झंडा
5) हर कीमत
देकर बचाएंगे
यह आजादी
6) देशभक्त हैं
आखिरी साँस तक
रक्षा देश की
7) प्यारा तिरंगा
ऊँचा सदा सर्वदा
रहे फ़हरा
8) न जान प्यारी
न कोई और चीज
देश प्यारा
(समाप्त)
अखिलेश चंद्र श्रीवास्तव
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सुप्रभात मित्रों...
नमस्कार.....
आज के चंद हायकू आतंकवाद पर....
- बड़ा धमाका
अंगभंग चीत्कार
भागते लोग
- बिखरा खून
बंधक बने लोग
बंदूकधारी
- मरे मासूम
आदमीयत हारी
दरिंदे खुश
- खून ख़राबा
आतंकवादी सोंच
मरता प्यार
- सोंच अज़ब
फैलाते हैं आतंक
ख़ुदा का नाम
(समाप्त)
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आज के हायकू देश की राजनीति पर
राजनीति
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1) सलामत हो
रहेे ये कुर्सी मेरी
गड्ढे में देश
2) मैं सदा रहूँ
चिपका कुर्सी पर
किसका देश
3) गलत सही
तय करते स्वार्थ
कौन है देश
4) देशद्रोही भी
साथी अपने यदि
साधते हित
5) ऊपरवाले
बचाना मेरा देश
लोगों से ऐसे
(समाप्त)
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नमस्कार मित्रों
आज के हायकू... मेरे देश पर ..जो मेरा सब कुछ है..
मेरा देश
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1) देश महान
हम सब संतान
माँ और बाप
2) देवों की भूमि
ऋषियों की तपस्या
समाई यहाँ
3) वीरों का देश
जोश रग रग में
कहीं तो कमी
4) रहे ग़ुलाम
इतिहास सदियों
कारण फूट
5) न तो सुधरे
औ न ही सुधरेंगे
स्वार्थ निहित
6) सीधा सवाल
जनमानस लोगों से
जागोगे कब
7) कैसी आज़ादी
किनकी है आज़ादी
भूँखा है पेट
8) धनी हो धनी
ग़रीब और ज्यादा
कैसी ये नीति
(समाप्त)
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