आकाश के चाँद में
तेरा अक्स
नज़र आता है
मुझे हर चेहरे मेंतेरा अक्स
नज़र आता है
बस तेरा चेहरा
नज़र आता है
बाहर भी तू ही तू
खूबसूरत नज़र आता है
कैसे सुख चैन पाऊँ
कैसे मैं बिताऊं
मेरा दिल सुकून पाता है
जर्रे जर्रे में बस तू ही
नज़र आता है
No comments:
Post a Comment