Wednesday, 25 March 2015

कविता :तलाश ईश्वर की

आकाश के    चाँद     में

तेरा                  अक्स
नज़र     आता         है
मुझे    हर     चेहरे    में
बस      तेरा        चेहरा
नज़र       आता        है
अंदर    भी     तू    और
बाहर    भी     तू   ही तू 
मुझे   हर  नज़ारा  बहुत
खूबसूरत  नज़र आता है
कहाँ    ढूँढूँ    तुझे  पाऊँ 
कैसे मन को   समझाऊँ
हे        ईश्वर           मैं
कैसे सुख   चैन     पाऊँ
जीवन    के बचे     छन
कैसे      मैं       बिताऊं
तेरे    ही   ख्यालों     में
मेरा दिल सुकून पाता है
जर्रे जर्रे में   बस   तू ही
नज़र      आता        है

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