जिस देश में ……….
कोई जलनीति नहीं हैसमुद्र में बाह जाता है
नियति नहीं है
बेटी सभी रूपों में
रुदन मच जाता है
नारी की दुश्मन है
कहीं अशिक्षित है
वो रोज मरती है मारी जाती है
बलात्कार के शिकार को
पुलिस प्रेम प्रकरण कह
निपटाती है
पुलिस प्रेम प्रकरण कह
निपटाती है
वोह नित्य मृत्यु को वरण करती है
उसकी इज़्ज़त धूल में मिल जाती है
(जबकि शर्म से मरना इस देश के नेतृत्व को चाहिये )
जिस देश में …….
कोई भूमि नीति नहीं है
कहीं पसरा है रेगिस्तान
कही पहाड ……पठार ……
खेती योग्य भूमि चंद
बड़े लोगों के है कब्जे में
बटाई पर चढ़ा के
जो मलाई खा रहे है
जो मलाई खा रहे है
मेहनतकश मज़दूर चाहे
भूँखा रहे
भूँखा रहे
तिकड़मी आलसी तोंदू
ऐश कर रहे हैं
ऐश कर रहे हैं
किसान फसल पैदा करता है
बिचवनिया खा लेता है
अढ़तिया खा लेता है
गोदामों में भरकर
जमाखोर ऐश करता है
जमाखोर ऐश करता है
कभी कभी तो फसल की
लागत भी नहीं मिलती
लागत भी नहीं मिलती
फसल तो प्रभुजी लगा दिये
पर अढ़तिया सही दाम नहीं दिये
किसान आठ आठ आँसू रोता है
अपनी जवान कमसिन बेटी को
खूसट बुढ़ऊ को व्याह देता है
वो नित्य जीता
और नित्य ही मरता है
और नित्य ही मरता है
देश में कोई कृषि नीति नहीं है
उत्पादों को बाजार में
बेचने की कोई जतन नहीं है
तमाम सरकारी खरीद का गल्ला
सड़ता है गोदामो में
तथा गरीब भूँख से मरते हैं
सड़कों पर ….. गाँवों में
हमारी कोई कारगर
वितरण नीति भी नहीं है
और गरीबी नित्य मरती है
(जबकि शर्म से मरना देश के नेतृत्व को चाहिये )
(समाप्त )
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