Monday, 16 January 2017

तांका की महक(whatsup)मालिका

1) नोटबंदी
    *******

मचा है शोर
संसद में हंगामा
नोटबंदी से
लोग है    परेशान
लोग तो   सराहते

हुए  इकट्ठे
कालाबाजारी चोर
औ भ्रष्टाचारी
संयुक्त मोर्चा   खोला
ख़िलाफ़     नोट बंदी

उन्हें लगता
वे    दबाव   बनायें
वापस होगा
फैसला नोटबंदी
सपनो में    वे जीते

बहुसंख्यक
जनता     समर्थक
नोटबंदी की
नकेल    काला धन
और     भृष्टाचार पे

मुँह की खाएँ
तमाम    विरोधी जो
नोटबंदी तो
अब न हटने की
कोशिश कर     देखें

(क्रमशः)

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2) नमस्कार मित्रों

आज भारत बंद का आवाहन
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(28-11-2016)

1)         भारत बन्द
    ख़िलाफ़ नोटबंदी
          बोरों में नोट…
काला धन वाले औ
     भ्रष्टाचारी  करते

2)       नाम जनता
    जिक्र है परेशानी
        स्वार्थ  अपना
काला धन     डूबता
भ्रष्टाचार का खात्मा

3)        उनकी नींद
      हुई आज हराम
         कहाँ विश्राम
चोरी की जो कमाई
      होती है हरजाई

4)    ज़ोर लगाओ
    सरकार दबाओ
           भारत बंद
    सरकार झुकेगी
  ऐसा उन्हें है भृम

5)     पूरा देश तो
     करता समर्थन
       नोट बंदी का
और छिडी लड़ाई
जो  है देश हित में

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3) आज 29-11-2016

तांका मालिका
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1) सूरजमुखी
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         सूरजमुखी
ताकती सूरज को
      जैसे प्रेमिका
   पूरब से पश्चिम
घूमती साथ साथ

2) सरसों का खेत
     ***********
    
        खेती सरसों
बिछी पीली चादर
       ऐसा दीखती
मन को सुखदायी
कायनात  बौरायी

3)आम का पेंड़
     *********

          फागुन आया
     पेंड़ आम बौराया
         गुच्छे के गुच्छे
  बौरों पे आते  आम
सुहानी फ़िज़ा  छायी

4) आलू भुना हुवा
     ************

         आलू निकालो
  वहीँ भून भी  डालो
            धनिया नोन
     बना डालो चटनी
छील छील के खाओ

5)   शकरकंद
       *******

              शकरकंद
मीठा होता जायका
            बहुत स्वाद
      सदा रहेगी याद
जम के खाओ आप

(क्रमशः)
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4)   आज दिनांक30-11-2016

तांका..मालिका--इंतज़ार
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कब तक मैं
रहूँ  इंतजारी में
आये  न तुम
क्या हुआ वोह वादा
आऊँगा खायी कस्म

वो वादा भूले
तुम मुझको भूले
ओ हरजाई
रो रो के बुरा हाल
बँधी हैं हिचकियाँ

कजरा    धुला
गजरा मुरझाया
सूनी  हैं  आँखे
दूर शून्य   निहारूँ
तुम हो परदेश

कौन  पोंछेगा
मेरे बहते आँसू
तुम्हारी यादें
छलनी है करती
मेरी पूरी जिंदगी

कैसे  निष्ठुर
हृदयहीन  तुम
न आते ही हो
न ही ख़बर  देते
हत भगिनी हूँ मैं

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5) तांका मालिका
            -मोर्चा खिलाफ नोट बंदी
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(व्यंग)

लगाओ ज़ोर
चाहे जितना तुम
नोट बंदी को
नहीं चलने देंगे
विरोध है हमारा

कालाधन औ
भ्रष्टाचार  से जँग
जीतोगे  नहीं
हम सब सबल
तुम पर है भारी

समेटो यह
अपना तीन पाँच
निकलो जल्द
अब झंडा  फहरे
भृष्ट काले धन का

(क्रमशः)

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6)तांका मालिका..."जाड़ा"
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1)      जाड़े की रातें
  कोहरा आच्छादित
         यात्रा   कठिन
     होते हैं  अपघात
    दीखे कठिनाई से

2)     जाड़े की धूप
     सुखदाई लगती
        मुझे   सुहाती
   तापते धूप    हम
    लेटे खुले आँगन

3)       स्वेटर कोट
   मफलर औ टोपी
          होते जरूरी
    बचाते हम ठण्ड
     इस सर्द मौसम

4)       मूंगफली हो
  या गज़क तिल की
          खूब है भातीं
     डिनर के बाद ही
          लोग है खाते

5)        ऊनी कपड़े
   लेके आते तिब्बती
           खूब  बिकते
      गरीब भी खरीदें
     सस्ते होते कपडे

(क्रमशः)

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आज 04-12-2016

7) तांका मालिका ..कोहरा
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1)        कोहरा घना
  रास्ता नहीं  सूझता
          ट्रैफिक जाम
    परेशान  पब्लिक
   इंतज़ार धूप   का

2)       ट्रेन    हैं  लेट
   फ्लाइट भी हैं  लेट
           फँसे है यात्री
    गलियां  बकते वो
   कोसते हैं किस्मत

3)       छाया कोहरा
   जाड़े की सर्द  सुब
          हवा है ठण्डी
     पीते हैं गर्म चाय
     गर्मागर्म  पकौड़े

(क्रमशः)
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8) तांका...अँधेरा
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दूर        अँधेरा
जीवन में उजाला
छा जो जायेगा
वोह शुभ  दिन भी
मेरा जल्द  आएगा

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9)तांका मालिका.. ठण्ड
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ठंड के मज़े
बहुत ही सुहाने
टोपी मफ्लर
दाँत  कटकटाते
सूट बूट दस्ताने

जेब में हाँथ
मुँह से निकलती
गर्म सी 'भाप '
काटती हुई हवा
मजा तो आ ही गवा

गज़क खाते
मूँगफली चबाते
धुप सेंकते
काटते सब ठण्ड
बढ़िया होती ठण्ड

गरीब लोग
अलाव हैं जलाते
तापते आग
दूर भगाते ठण्ड
ऐसे ही वे भी जीते

(समाप्त)
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10) तांका मालिका..उदास हूँ मैं
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उदास हूँ मैं
आज का सारा दिन
कुछ भी नहीं
कोई कारण नहीं
बस हूँ मैं उदास

कारण ढूँढूँ
मन की बेचैनी का
उदास मन
समझ  न हूँ पाता
दर्द से कैसा नाता

कभी कभी ही
होता है ऐसा भी तो
बता न पाता
क्या है मुझे सताता
मन  नहीं    बताता

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11) नमस्कार मित्रों..
आज 28-12-2016 प्रस्तुत है 6 तांका

तांका ...6 तांका
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प्यार
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तांका संख्या (01)

1)         प्यार करना
   मुझे कभी न आया
           न ही खुद से
  न ही किसी और से
   कितना रूखा हूँ मैं

उपकार
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(तांका संख्या 2 से 6 तक)
2)        इंसान तो हूँ
        पर भगवान ही
            बनना चाहा
लोगों की किस्मत को
    ही  बदलना  चाहा

3)        लोग नाराज़
    उनकी उम्मीदें थीं
              बहुत बड़ी
      मेरे  प्रयास बौने
      असफल हो गये

4)        बहुत लोग
   जो होते बुद्धिमान
             नहीं करते
     ऐसे कोई प्रयास
    बदलना किस्मत

5)       वोह न खाते
   गाली या अपशब्द
          कोशिश नहीं
    भाग्य रेखा सुधारें
  किसी हतभागी की

6)         सेफ है गेम
  नो प्रॉफिट या लॉस
           अपना मज़ा
    क्यों पड़ना झंझट
     अपना ही देखना

(क्रमशः)
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12)तांका...देश से प्यार
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पहिला प्यार
मेरा देश से प्यार
वो मेरा दिल
मेरी जान औ शान
सौ बार मैं कुर्बान

देश से प्यार
दिल में है बसाया
सारा जीवन
अर्पण है देश पे
सम्पूर्ण समर्पण

न कोई कभी
हो सकता प्यारा औ
इससे ज्यादा
दुलारा सोंचता मैं
नहीं बिल्कुल नहीं

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13)तांका मालिका ..विलेन नोटेबन्दी के
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लंबी लाइन
न कैश ATM में
न मिले बैंक
जनता है हैरान
चोरों की हरक़त

मिली भगत
काला सफ़ेद खेल
बागड़बिल्ले
खेलें हरामख़ोर
कौन है बड़ा चोर

सब हैं नंगे
इस हम्माम  भाई
फेल करना
नोटबंदी   इरादा
उनका  वे विलेन

जवान हो या
बूढ़े चोर हैं सब
हुए शामिल
साजिश है करते
देशद्रोह करते

उत्सुक होते
हम सोंचते   होगी
क्या कोई कभी
सज़ा अपराधियों
हरामखोरों पर

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14): तांका मालिका.... नववर्ष 2017
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1)            नव प्रभात
        आया है नव वर्ष
              करो स्वागत
    खुशियों को मनाओ
   हँसो नाचो औ गाओ

2)         जो बीत गया
       वर्ष जो पुराना था
              संभाला हमें
        भुला न सकते हैं
           उसके एहसान

3)           नहीं कृतघ्न
        मान सहित विदा
         हो ....गया साल
        हमारी जिम्मेदारी
      विदा करो स्वीकार

4)          बाटें खुशियाँ
        तो बढ़ती हैं खूब
        तथ्य      ये जाने
         सबको अपनायें
        गले  उन्हें लगायें

5)          भूल दुश्मनी
         कड़वाहट ईर्ष्या
              भेजें सन्देश
     खुशियों का अम्बार
     आस पास  मुस्कान
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15): तांका ..समूह
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1)नववर्ष ..पहिला दिन

पहिला दिन
बधाई लेते देते
बीत गया वो
नववर्ष    आगाज़
बिना शोर आवाज

2)हिसाब करो

हिसाब करो
क्या खोया और पाया
गये    बरस
अब क्या है विचार
सोंचो विचारो करो

3) सँवारो  .. जो बचा...

जो बीत  गया
वोह बात ही गयी
अब  जो  बचा
उसे अब सँवारो
बचा लो उसे तुम

4)तुम्हारा मौन

तुम्हारा मौन
करे   मुझे बेचैन
कुछ तो बोलो
अपनी जुबाँ खोलो
क्या हुवा क्यूँ हो दुखी

(क्रमशः)

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16) तांका की महक में  परिवार का घमासान...

तांका मालिका.. पारिवारिक दंगल
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1)          नूरा कुश्ती ये
         बाप बेटे के बीच
                सब जानते
      ये है फैमिली ड्रामा
      पार्टी  है व्यक्तिगत

2)      पार्टी  तो   बनी
       घरेलु संपत्ति   सी
              सौतेला बेटा
       हटा अपना लाओ
      कहे सौतेली अम्मा

3)           झगड़ा बढ़ा
        चुनाव चिन्ह  पर
               करे फैसला
      चुनाव आयोग जो
    होगा वोह तो फ्रीज़

4)          सोंचे भारत
      सोंचे प्रबुद्ध लोग
          क्या कोई दल
     होना चाहिये जैसे
      व्यक्तिगत संपत्ति

5)          प्रजातंत्र में
      केवल हो दो दल
        सत्ता    विरोधी
      दो ही पक्ष उत्तम
        भृष्टाचार रहित

6)           रखें वे बात
      होये  स्वस्थ बहस
            बाधा    रहित
      सुचारू चले  काम
      जनता का फायदा

7)         निजी दल हों
        बंद बाप बेटा या
              माँ बेटा दल
       केवल  जनता से
        चुनें अपना नेता
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17) आज 04-01-2017
प्रस्तुत है...

तांका मालिका...अधूरा प्यार
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अधूरा प्यार
न पाया पूरा कभी
मन टीसता
न  कही   मन की या
सुना उसका मन

कोई भी न थी
मज़बूरी   लेकिन
जकड़े  होंठ
दिल की बात जुबाँ
न आयी भीगा मन

समय बीता
कहने सुनने का
कर  विवाह
गयी वो दूर देश
हम अधूरा प्यार

अब सोंचता
दोषी था कौन भाग्य
समय    या मैं
घुटता रहा मैं दुःखी
मैं औ   अधूरा प्यार

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18) आज10-01-2017
प्रस्तुत है..
तांका मालिका... उदास
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सुब  उदास
शाम भी तो उदास
तुम नहीं हो
मेरे ज़नाब .. पास
मेरा जहाँ   उदास

उदास   रहूँ
रोऊँ या मरुँ तुम्हें
फ़िक्र है कोई
गयीं मायके तुम
मेरी  ऐ   हमदम

उठाया  नहीं
गर्म चाय की प्याली
पिलायी नहीं
सोते सोते ही   रहा
विरह   राग   गाता

उदासी   छटे
बेगम  वापस हों
घर   सम्हालें
मुझको भी वो पालें
प्रभु करो जतन

(क्रमशः)

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Wednesday, 28 December 2016

हाइकु श्रृंखला..अंक 23 शीत.. कोहरा ..ठण्ड ..अलाव अदि

आज 25-12-2016 हाइकु मञ्जूषा अंक23 के चयनित विषय शीत  ..ठण्ड ..कोहरा..ओस ..अलाव आदि ...पर चंद हाइकु

1) 'कोहरा'  छाया
         दृष्टि हुयी बाधित
              ट्रैफिक जाम

2)'ठण्ड ' बढ़ी
      ऊनी वस्त्र पहनों
         बचाओ 'शीत'

3)कमाल 'ओस '
        फूलों पे छाये मोती
                 झिलमिलाते

4)'ठंडा' मौसम
      गज़क तिल गुड़
         आई    बहार

5)भुनी सींग या
     आलू   नमक साथ
         मजे    'ठण्ड 'के

6)'अलाव 'घेरे
       तापते    सारे लोग
             'शीत'    बचाते

7)गरीब लोग
      ' अलाव '  के सहारे
               ठण्ड बचाते

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आज 26-12-2016 चंद हाइकु ..हाइकु मञ्जूषा अंक 23 के लिए चयनित विषय पर..

1) शीत लहर
        ढाती है क़हर ये
            लोग  बीमार

2) कोहरा छाता
        यात्रा होती कठिन
              धीमा ट्रैफिक

3)ओस यूँ दिखे
       जैसे मोती लटके
            पत्तियों    पर

4)ठण्ड की मार
        फसलें बरबाद
          रोते किसान

5)सूट बूट औ
       शाल ओढ़ते सब
          जाते      घूमने

6)ठंडी  हवायें
        बहुत हैं सताती
               फटते होंठ

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आज 28 -12-2016..चंद हाइकु ..हाइकु मञ्जूषा के अंक 23 के लिए चयनित  विषय पर...

1) ठण्ड की मार
       किसान  परेशान
           बुवाई    कैसे

2) ओस की बूँदे
       पत्तियों पे गिरतीं
               ढरक रहीं

3) फटी ओढ़नी
       पहिन के कमला
                ठिठुर रही

4) कोहरा छाया
       दृष्टि दूरी सीमित
               ट्रेनें हैं लेट

5) अलाव जले
       लोग पास हैं  बैठे
             आग सेंकते

6) ठण्ड के दिन
       मूँगफली गज़क
           लोग हैं खाते

7) ओढ़ रजाई
       टोप और कंटोपा
           कलुवा  सोता

8) शीत लहर
        शहर को लपेटे
             बंद बाज़ार

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आज 29-12-2016 चंद हाइकु ..हाइकु मञ्जूषा अंक 23 के चयनित विषयों पर..

1)कंपकपाती
        ठंडी हवाएँ  लगें
            जैसे   थप्पड़

2)अलाव जला
      तापते वे बदन
         गरीब   लोग

3)न कोई छत
       आसमान  के नीचे
            मरे    ठण्ड  से

4)नहीं सौभाग्य
      न गर्म  हैं कपड़े
         शीत     लहर

5) फूलो पे ओस
        ऐसी है चमकती
             बिखरे  मोती

6)अलाव जले
        सब जन आ मिलें
            चर्चा   गांव  पे

7)भूनते  होरा
        खाते हैं गर्मागर्म
            राहत   ठण्ड

नोट:-
होरा..(चने के पौदे पर दाने  वाली फली जब उसमे दाने  आ जाते हैं .. उसे पेंड सहित जलाकर होरा बनता है ..जो बहुत स्वादिष्ट होता हैं..)

(क्रमशः)
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आज 30-12-2016 चंद हाइकु ..हाइकु मञ्जूषा अंक 23 के चयनित विषयों पर

1) बूदें ओस की
       यूँ हैं झिलमिलाती
            मोती की खेती

2)कोहरा  घना
      छाया  है अंधकार
        बेचैन        मन

3)शीत लहर
        बंद हैं दरवाजे
         काटें    समय

4)जला अलाव
      तापते  हैं वे सब
        ठण्ड    बचाते

5)बर्फ गिरती
      हर तरफ दिखे
          श्वेत   चादर

6)सैलानी आते
      बर्फ से वो खेलते
           ठण्ड का मजा

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आज 31-12-2016 इस साल का आखिरी दिन ..इसने हमे बहुत प्यार से रक्खा और संजोया ..हम सब इसके प्यार के प्रति सदा आभारी रहेंगे..साथ हमें हमारे तमाम दोस्तों से मिलाया और उनका प्यार दिलाया उसका भी हम आभार मानते हैं..साथ ही साथ नयी उम्मीदों और सपनों के साथ आनेवाले साल 2017 का भी स्वागत.. इस्तकबाल और वेलकम करते हैं..और साथ ही अपने सभी मित्रों ..हितैषियों..सम्बन्धियों ..मिलने वालों को नए साल की मुबारकबाद..शुभकामनायें भी देते हैं.....आप सभी का नववर्ष मंगलमय हो..

अब आज के चंद हाइकु ..हाइकु मञ्जूषा अंक 23 के चयनित विषयों पर..

1)ठण्ड से भरी
       कोहरीली हैं रातें
           पिया न पास

2)ओस बरसी
       सड़कें  हुई गीली
           फिसलन    है

3)जले अलाव
       जमा कूड़ा कचरा
           तापते     लोग

4)खुला आसमां
        कड़ाके की है ठण्ड
               ठिठुरें     लोग

5)शीत     लहर
      ठंडक  का प्रकोप
            हैरान    लोग

6)कोहरा छाया
        मन है घबराया
          पिया न आये

(समाप्त)

Saturday, 24 December 2016

हाइकु श्रृंखला..मञ्जूषा अंक 22

नमस्कार मित्रों ...

आज24-12-2016 चंद हाइकु ....हाइकु मञ्जूषा अंक 22 के चयनित विषय पर...

1) जल में क्रीड़ा
          कलरव  करते
             निहारो पक्षी

2)कोयल कूके
          गाये मल्हार गीत
              बरसे     पानी

3)प्रीत के गीत
         गाता है ये मौसम
              सावन  आया

4)मन उदास
         वर्षा साजन बिन
             उजड़ी    नींद

5)गाना बेसुरा
         बेवक्त शहनाई
           भाये  न गीत

6)"पी" बिन जीना
       जल बिन सावन
            सूनी जिंदगी

(क्रमशः)
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Wednesday, 14 December 2016

हाइकु श्रृंखला..जीव जंतु..पशु पक्षियों की बोलियाँ

आज 12-12-2016 चंद हाइकु ..हाइकु मञ्जूषा अंक 21 के दिए गए विषय पर (आज कीड़ों ..पक्षियों और पशुवों की आवाज या ध्वनियों पर..)...

1)  "कुहू " "कुहू "जो
         बोले ..रस वो घोले
               कोयल काली

2) कौव्वा भी काला
    कर्कश " काँव " "काँव"
           उसकी      बोली

3)पोपट हरा
         लाल  उसकी चोंच
            "  राम नामी "वो

4)"खौं " "खौं "करता
        उछलता   कूदता
            वो    है  बन्दर

5)"मिमियाती"  वो
        चरती  रहती  घास
              वो तो   बकरी

6)"फुंफकारता"
         उठा अपना फ़न
              नाग   देवता

7) गोल   घूमता
        "गुन "गुन "करता
            भौंरा    अपना

8)रात   अंधरी
      "भनभनाते " कीड़ें
             मोमबत्ती   पे

9)झींगुर  "बोलें"
        अजीब डर घोलें
           सूनी      डगर

10)"कर्कश" होती
        आवाज उलूक़ की
              उजाड़  बस्ती

11)"चूँ " "चूँ " करती
          मेहनत करतीं
             ये हैं  गौरैया

(क्रमश)

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नमस्कार मित्रों...

आज 13-12-2016 हाइकु मञ्जूषा के अंक 21 के लिये चंद हाइकु दिए गए विषय पर..

1)गूँ  गुटुर गूँ
        बोलते  कबूतर
             बैठ   मुँडेर

2) दूध  संभालो
      देखो  बिल्ली बोलती
         है  "म्याऊँ ..म्याऊँ"

3) कुत्ते भौंकते
       आधी रात बीतते
            कुछ तो बात

4)कूँ  कुकड़ूं कूँ
       मुर्गा देता है बाँग
             हुआ सवेरा

5)   मिमियाती औ
        चरती वो है घास
             मेरी   बकरी

6) शेर चिंघाडा
        जंगल का वो राजा
               भागे    हिरण

7)चहचहाती
      हैं चिड़ियाँ   गौरव
             वोह बाग़ की

( क्रमशः)

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नमस्कार मित्रों..

आज 14-12-2016  चंद हाइकु  ..हाइकु मञ्जूषा  के अंक 21 ..दिये गए विषय पर..

1)मुर्गा   बाँग दे
    "कूँ  कुकडू कूँ " उठो
           हो  गयी    भोर

2)आयी   बारिश
      " टर्र  टर्र टर्राते"
           गाते  दादुर

3)मधु मक्खी   है
      आयी "भिनभिनाती"
        पास   है     छत्ता

4)शेर   तो राजा
       "दहाड़ता "  जँगल
            डरते       पशु

5)कौव्वे  करते
   "काँव  काँव" का शोर
         साँप  जो    देखा

6)टिटिहरी   तो
     दौड़ती  औ कूदती
          "टिर   टिराती"

7)फूल   हँसते
      भँवरे   "गुनगुनाते"
         शर्माती    कली

8)पेंड      झूमते
        हवा  "सरसराती"
            झड़ें   पत्तियाँ

9) संध्या  समय
         पंछी लौटे नीड में
             हो    "कलरव"

10)जलेबी     पर
  मक्खी  " भिनभिनाती"
           ढँक    के    रखो

(क्रमशः)

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नमस्कार मित्रों...

आज 15 दिसंबर 2016 ..चंद हाइकु ..हाइकु मञ्जूषा के अंक 21 के दिए गए विषय पर...

1)सिंह "गर्जना"
     घबराये हैं प्राणी
         वन्य  जीवन

2)ताके   चकोर
        चंद्रमा की ही  ओर
            " पिहु "हो  कहाँ

3)विरही  मन
       ढूँढता है  साजन
           "रोता" सावन

4)कोयल "कूके"
       आम की डाली पे
           आया    बसंत

5)बैठ      मुँडेर
     कागा की "काँव काँव"
           आते        पाहुन

6)मिट्ठू   भूल
      कारावास का गम
        ले   "राम नाम"

7)चढ़ी अटारी
      बिल्ली बोले "मियायुं"
           दूध     बचाओ

(क्रमशः)

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[12/16, 12:53] Dr Ranjana Varma: 🙏
[12/16, 14:42] akhileshchandra srivastav: नमस्कार मित्रों

आज 16-12-2016 चंद हाइकु ...हाइकु मञ्जूषा 21 के दिये गये विषय पर...

1) " खटर  खट"
         चलती वोह रेल
          मंजिल   आती

2)"साइरन" है
       दौड़ो भाई काम पे
          यही      जिंदगी

3) बँदर  नाँच
       " डुगडुगी " बजती
           आया     मदारी

4)साँप नचाता
      " बीन" वोह बजाता
          बच्चे        देखते

5)"सरसराती"
      ठंडी हवा बहती
         हाड़   कपाती

6)"टप टप" वो
       बरसती  रात में
           डर   लगता

7)"टर्र टों टर्र"
       मेढक हैं चिल्लाते
            बारिश   आयी

(समाप्त)

Sunday, 11 December 2016

हाइकु श्रृंखला..मेहनत काश लोग दरजी...लोहार आदि

नमस्कार मित्रों..

आज 04-12-2016 हाइकु मञ्जूषा के अंक 20 के लिये ..चंद हाइकु दिये गये विषय पर....

1)मोची बनाता
      जूते चप्पल बैग
         सेवा  समाज

2)  हल का फाल
       फावड़े औ कुदाल
             काम   लोहार

3)काम लकड़ी
       बढ़ई है करता
           लोगों के घर

4)तेल  निकाले
      जो तिलहन से वो
           तेली    कहाये

5)खेती   किसानी
       धंधा मुख्य गाँव का
           होते      किसान

6)श्रम  करते
         जमीन  दूसरों की
             वे       मज़दूर

7)बाल  काटते
       हजामत  बनाते
          वो होते  नाई

8)पालते  पशु
        बेचते दूध उन्हें
          कहते  ग्वाले

9)पशु   चराये
       भेड़ बकरी पालें
           वे   गराड़िया

10)मिट्टी के  बना
        बर्तन जो  बेंचता
            वो      कुम्हार

11)कपडे धोता
          प्रेस करके लाता
              वोह है  धोबी

12)नाप वो लेता
         कपडे सब सीता
             कहते    दर्ज़ी

13)बच्चे  पढ़ाते
        स्कूल वो लगवाते
            वो  मास्टर जी

14)रात को जागे
            पहरा  गाँव रखे
                है  चौकीदार

15)रखे   चौकस
        रिकार्ड ज़मीं  खेत
               है     पटवारी

(क्रमशः)

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नमस्कार मित्रों..
आज 07-12-2016

आज के चंद हाइकु ..हाइकु मञ्जूषा के अंक 20 के लिये दिए गए विषय पर..

कुली
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1)उठा सामान
    आगे आगे चलता
        वो होता  कुली

कार ड्राइवर
**********

2)कार चलाये
    मंज़िल पहुँचाये
         वो   ड्राइवर

नाविक
******

3)नौका चालन
      नदी बीच सहारा
           होता नाविक

सुनार
*****

4) चमके सोना
      उत्तम कारीगर
         सुनार  होता

5) गढ़े  गहने
        प्यारी लगे दुल्हन
           माँग   बेंदी  से

चौकीदार
********

6)  घर सुरक्षा
      मोहल्ले की भी रक्षा
             है    चौकीदार

माली
*****

7)पौधे लगाता
       सींचता औ बढ़ाता
            फूल  खिलाता

8) बाग़ बगीचे
        माली ने है लगाएँ
            खिलते   फ़ूल

(क्रमशः)

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हाइकु श्रृंखला ..रवी.. खरीफ ...जायद की फसलों पर


नमस्कार मित्रों
आज 28-11-2016 चंद हाइकु ..हाइकु मञ्जूषा अंक 19 के विषय..खरीफ,रबी व जायद की मुख्य फसलों पर...
…/
1)बालियाँ गेहूँ
      जो लहराती झूमें
           लोग   झूमते

2)धान  के खेत
       पकी बालियों साथ
            सोने   से   लदे

3)चने  के पौधे
        यूँ ही खाते तोड़ के
             साग  चने  का

4)मटर छीमी
       भरे मटर दाने
            कच्ची हैं खाते

5)साग सरसों
       लगता स्वादिष्ट
           रोटी  जवार

6)गर्म बाज़रा
       रोटी साथ हो गुड़
            बने    मलीदा

7)भुना हो भुट्टा
      बारिश का मौसम
           स्वाद  बेजोड़

(क्रमशः)
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नमस्कार मित्रों..

आज 29-11 2016 हाइकु मञ्जूषा ..अंक 19 के लिये दिये हुए विषयों पर चंद हाइकु प्रस्तुत है..

1)           फूली सरसों
         खेत दिखें सुन्दर
             पीली   चादर

2)            धानी  चुनर
         ओढ़ झूमते खेत
            फसल    धान

3)         मक्के दी रोटी
      औ सरसों का साग
            क्या लाजवाब

4)          गेहूँ   बालियाँ
        सोने सी चमकतीं
             लुभाती   हमें

5)                 कहते बूट
       चने की मस्त  फली
            स्वादिष्ट    होती

6)             चने के पौदे
         मय फली जलाते
              कहते  "होरा"

7)             मटर  फली
     कच्ची भी सब खाते
             होती  स्वादिष्ट

(क्रमशः)

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नमस्कार मित्रों...

आज 30-11-2016 चंद हाइकु ..हाइकु मञ्जूषा के अंक 19 के दिये गये विषय पर...

1) आम के बाग़
        लटकते गुच्छे
           आम ही आम

2) बौराया  आम
       महकी  अमराई
           सुहाना  समां

3) भूनते   आलू
      खाते गरमागरम
           धनिया  नोन

4)साग चने का
      नयी नयी कोपलें
         अनूठा    स्वाद

5)भूनते " होरा"
      जलाते चना पौदा
         खाते   वो  गर्म

6)खेत धान के
       लगते वे सुहाने
           श्रम किसान

(क्रमशः)

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नमस्कार मित्रों..

आज 03-12-2016..चंद हाइकु ....हाइकु मञ्जूषा अंक 19 केदिए गए विषय पर..

स्वाद स्पेशल
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1)भुने  हों आलू
    औ चटनी धनिया
      सुन्दर स्वाद

2)शकरकंदी
      उबली दूध साथ
        मुझे    सुहाती

3)लाल  मिरची
       का भरवाँ  अचार
          स्वाद   खजाना

4) चुकंदर  तो
       बढाती खूब रक्त
            स्वास्थ्यकारी

5)भुने  हो भुट्टे
      बरसाती  मौसम
          खूब है  भातें

6)नींबू  अचार
      ठीक करे बीमार
         ऐसा     कहते

(क्रमशः)

अखिलेश चंद्र श्रीवास्तब