एक दिन अचानक जब ...
गली में जाते जाते ....
आवारा कुत्ते ने काट खाया ...
मैं दर्द से चिल्लाया ...
दिल मुँह मे हो आया ....
तमाम बदन और मुँह पर
पसीना ...छल छला आया ....
बहुत गुस्सा भी आया
मैंने एक बड़ा सा पत्थर उठाया ...
कुत्ते पर दे मारा ... वोह गिरा .......
दर्द से छटपटाया ...
हाथ . .पैर फेंके ...
और देखते ही देखते ...
ठंडा हो गया ...
कुत्ते के प्राण पखेरू उड़ गए ..
लोंगो के मेले लग गए
लोग कभी कुत्ते को ..
कभी मुझे देखते थे ...
कुछ बोले ,,,
बहुत अच्छा किया ....
बड़ा कटखन्ना कुत्ता था
हर किसी को बिला वज़ह ..
काटता फिरता था ...
बच्चे बूढ़े जवान ...
सभी संतृस्त थे
उस कुत्ते के आगे पस्त थे ...
किसी ने कहा कि भाई साहब ..
काटा था तो क्या ..
इंजेक्शन लगवा लेते ..
पर जीवहत्या तो न करते
कोई बोला भाई साहब
आपने अच्छा नहीं किया ..
जीव दया वालों से
नाहक पंगा लिया ..
वे आते ही होंगे ......
अब आपकी वो ही ख़बर लेंगे ..
अचानक दिखी एक वर्दी ...
पुलिस का सिपाही ..
अरे भाई इस कुत्ते की ...
दिन दहाड़े हत्या
किसने कर डाली
किसकी है शामत आयी ......
"मेनका जी " से ले लिया पंगा ...
अब शहर में हो के रहेगा दंगा ...
लोगों ने मेरी ओर इशारा किया ...
सिपाही ने मुझे
एक किनारे लिया .... .बोला
ज़नाब बवाल में फँस जाओगे ...
"सौ रूपये निकालते हो ...या
हथकड़ी लगवाओगे ..."
मैंने कहा "सौ रुपये किस लिए"..
बोला थाने चलो ..
सब समझ जाओगे ..
दो दिन बंद रहोगे ...
मार खाओगे . .तब
सब जान जाओगे ..
अरे भैया " कुत्ते की हत्या पाप है
कानूनन जुर्म है
उसमे भी अदालत है जुर्माना है
बोलो जेल की हवा खाना है ..."
मैं कुत्ता काटे का
दर्द भूल चुका था .....
मेरा प्यास से
हलक सूख चुका था
मुझे हवालात दिखती थी
यमदूत सा सिपाही दिखता था
मरता न क्या करता ..
सिपाही जी को पटाया .....
5 0 का नोट पकडाया ..
कान को हाँथ लगाया ...
कसम खाया ...
सिपाही जी गल्ती हो गयी ..
कुत्ते ने काटा था
उसे सलाम करता ..
पर कुत्ते को कभी ना मारता ..
क्या करूँ किस्मत ख़राब थी
दिल में मेनका जी की याद थी
क्या अज़ीब देश है अपना भी ..
लोग रोज़ मरते हैं . .मारे जाते हैं ...
सड़कों पर पड़ी रहती हैं .लाशें ...
फोटो खिचतें हैं .. .तफ्शीश होती है....
पर ना ही फ़िक्र करता है कोई ...
न जनता न पुलिस न और कोई .....
अगर गल्ती से
पकड़ा भी जाता है मारने वाला
अदालत से छूट जाता है
पर कुत्ते को मारने पर ...
जीव दया वाले दौड़ पड़ते हैं
लगाते हैं तमाम तोहमत
मारने वाले पर
जबकि इन्सान को मारने पर
चर्चा नहीं होती
जीवदया वालों को
कोई फ़िक्र नहीं होती
काश ...इंसान को भी
सही जाना जाता
कम से कम कुत्ते से
तो बेहतर ....माना जाता
कम से कम कुत्ते से
तो बेहतर माना जाता
कम से कम कुत्ते से
तो बेहतर माना जाता
(समाप्त)
विशेष नोट :
आवारा कुत्तों की संख्या रोक टोक के अभाव
में बेहिसाब बढ़ रही है और ये वरिष्ट नागरिकों
बच्चों समेत सभी लोगों के लिए खतरा बनते
जा रहें है इनके काटने से लोग घायल और
असमय मौत के मुंह में जा रहे हैं उचित इलाज
न मिलने से गरीब लोग इनका ज्यादा शिकार
होते है इनका कोई मालिक न होने से शिकायत
और हर्जाना का भी कोई प्रावधान नहीं है उधर
सरकार इनकी जनसँख्या कम करने के लिए
कोई प्रभावी कदम नहीं उठा पा रही है अतः
आवश्यकता इस बात की है कि इस विषय में
इनकी निरुपयोगिता और खतरे को देखते हुए
कुछ प्रभावी कदम उठाये जाएँ जिससे जनता
को इनसे निजात मिले
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