मुझे नहीं अच्छे लगते हैं .......
सूखे पेंड ..... गिरे हुए पत्ते ...
टूटे हुए काँच ..............
रुकी हुई घडी ....
बीमार लोग
जलती चिताएँ ......
मार - काट ............
क्योंकि ये
मार - काट ............
क्योंकि ये
जीवन के विपरीत ..........
जीवन के उलट
जीवन के उलट
स्थितियाँ हैं
हरे भरे .... ..फलदार पेंड .......
प्यारी सुहानी हवाएँ
कांचों से सजी बिल्डिंगें ....
चलती और समय का
हरे भरे .... ..फलदार पेंड .......
प्यारी सुहानी हवाएँ
कांचों से सजी बिल्डिंगें ....
चलती और समय का
पता देती घडी
स्वस्थ लोग ....
स्वस्थ लोग ....
जीवन से सराबोर ...
सब तरफ
सब तरफ
भाई चारा ... प्रेम ..........
मुझे बहुत
मुझे बहुत
तहसल्ली देते हैं ....
उस ईश्वर पर
उस ईश्वर पर
विश्वास करने को
दिल होता है
जिनके सृजन ने
जिनके सृजन ने
इन्हें रचा है
काश सब कोई
काश सब कोई
जीवित रहते सदैव ......
हँसते बोलते बतियाते ...
.तो . जीवन ...
कितना अच्छा होता ..
मुझे भाता और
हँसते बोलते बतियाते ...
.तो . जीवन ...
कितना अच्छा होता ..
मुझे भाता और
स्वर्ग सरीखा होता .
(समाप्त)..
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