हाँ वो मैँ ही तो हूँ
जो बहता है पानी की रवानी बनकर
जो बहता है शीतल हवा बनकर
जो चमकता है आसमान मेँ बिजली बनकर
जो कड़ककर टूटकर गिरता है क़हर बनकर
हाँ वो मैँ ही तो हूँ
जो खेतोँ उगता है अन्न बनकर
जो पेडों पर लटकता है फूल फल बनकर
जो जड़ बनकर पेड़ों को खड़ा रखता है
जो मनुष्यों के जीवोँ के शरीरों में रहता है
जो सारे जगत की हरियाली में बसता है
जो संसार के सारे कार्यकलापों को करता है
जो संसार का भाग्य विधाता और नियंता है
हाँ वो मैँ ही तो हूँ
जिसे तुम आत्मा कहते हो
जो तुम्हे जीवित और गतिमान रखता है
जो तुम्हे जीवन देता और जीवन जीना सिखाता है
जो जीवन में क्या करना और क्या नहीं सिखाता है
नेक विचार हैं आपके ! बधाई !
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