मृत्यु क्यों इतनी..........
निर्मम निर्मोही
और क्रूर होती है
कि उठा ले जाती है
घर का इकलौता चिराग
कमाने वाला बेटा
घर चलाने वाला पति
छोटे छोटे बच्चोँ की
प्यारी प्यारी माँ
मृत्यु के क्रूर हाँथ क्यूँ
लूट लेते हैं किसी
सधवा का सुहाग
किसी बृद्ध माँ बाप का
एकलौता कमाउ बेटा
उनके बुढ़ापे की लाठी
किसी प्रेमी की प्रेमिका
मृत्यु अकाल ही
लूटती है जीवन
दुर्घटना बन
किसी आतितायी की गोली बन
किसी की तलवार बन
काटती है गर्दन
पर मृत्यु नहीं हरती प्राण
उस प्राणी का जो
मारना चाहता है
जो बीमारियों से दुखों से
लड़ता लड़ता थक चुका है
बुढ़ापे ने जिसे जर्जर कर दिया है
बीमारियों ने जिसे
खोखला कर दिया है
वह मृत्यु माँगता है
ईश्वर से प्रार्थनाएँ करता है
पर मृत्यु उसके
आस पास नहीं फटकती
अतः प्रश्न उठता है कि
मृत्यु इतनी निर्मम
निर्मोही और क्रूर क्यों होती है ?
ये ईश्वकर का विधान
इतना सख्त क्यों है …?
कि जो मरना नहीं चाहते
अपितु जीना चाहते हैं
असमय मारे जाते हैं
उनके परिवार
आँसुओं में डूब जाते हैं
और जो मरना चाहते हैं
पीड़ा से दुःख से
जर्जर शरीर से छुटकारा चाहते हैं
मर नहीं पाते
ये ही मृत्यु के क्रूर निर्मोही
निर्मम होने के
प्रत्यक्ष प्रमाण हैं
और साथ ही साथ
ईश्वर की इच्छा
और उसके विधान का प्रमाण भी
(समाप्त )
अखिलेश चन्द्र श्रीवास्तव …
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