कविता : मन चाहता है
कमली का मन चाहता है कि
उसे कोई उसे प्यार करे ……आपस में प्यार करते हैं
स्वछन्द बाँहों में बाहें थामे
माँ बनना चाहती है
तुतलाना चाहती है उन्हें सजाना चाहती है
पर उसके मज़दूर माँ बापउसे इशारे करता है और जब वोह
ऐसे ताकता है कि बस खा ही जायेगा
उसे पंचम का यूूँ ताकना कहीं
उसे भी पंचम भाने लगा है
और वोह उसके सपनों में आने लगा है
दोनों तरफ बराबर आग लगी है
अब शरीर का साथ मन भी देता है
जैसे प्रकाश करता है प्रभा के साथ
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