Monday, 18 July 2016

चंद हायकू ...

चंद हायकू....
*********

1) चीखें सन्नाटा
     कुछ तो हुवा ही है
     मुझे    भरम

2)  प्यार है मुझे
     ये तुमने कहा था
     बेवफा तुम

3)  इंसाफ होगा
      मेरे साथ कोर्ट में
      ये खूनी खेल

4)  कौन जानता
      उसके खेल सारे
      सूना आसमां

5)  रोज़ा अफ्तार
      बिना रोज़े के ही
      वोटों पे आँख

अखिलेश चंद्र श्रीवास्तव

हायकू श्रृंखला " आयी ईद "

एक महीने के पवित्र "रमजान ..रोज़ा और कठिन उपवास के बाद "दिखा है चाँद और आयी ईद की ख़ुशी..

आयी ईद
********

दिखा है चाँद
चलो     ईद मनाएँ
भूल   शिकवे

ईद का चाँद
मुश्किल से है दिखा
बादलों  बीच

ईद    त्यौहार
भाई चारे    प्रेम का
बाँटो खुशियाँ

बड़ों से    लेके
ईदी     पाएँ   खुशियाँ
मीठी सिवैय्यां

हमारी ईद
बने पैगामे दोस्ती
चाहता रब

अखिलेश चंद्र श्रीवास्तव

हायकू श्रृंखला " ओ मेरे ख़ुदा "

ऊपर ख़ुदा की मौजूदगी के एहसास के बावजूद  भी आदमी अपनी चालाकियों और गलत  हरकतों से  बाज़ नहीं आता और गल्ती पर गल्ती करता है...

"ओ मेरे ख़ुदा"
***********

ऊपर ख़ुदा
नीचे  उसका नूर
मरा ज़मीर

उसके बन्दे
होशियार हो गये
बिके ईमान

मुझे न पूँछ
ज़मीर में अपने
टटोल उसे

बिकता सब
खरीदने वाला हो
ये   है बाज़ार

हैं  होशियार
सब कोई मगर
वोह लापता

(समाप्त)

हायकू श्रृंखला "बैरी बरसात "

बारिश हो रही है और पिया गये बिदेस...तड़पती विरहिणी..इसी विषय पर पेश है..

"बैरी -बरसात "
***********

बदरा    घिरे
बरसे नयन भी
पिया न आये

रिमझिम  है
बिजुरिया कड़के
मन    धड़के

पिया  बिदेस
मन  हुवा व्याकुल
बैरिन रात

क्या करूँ  मैं
किधर जाऊँ अब
अधीर    मन

विरही    मन
सुनता है न कुछ
पिया मिला दे

बरसे पानी
नैना  बरसें मेरे
याद सताये

कटे   न रात
घेरा बेचैनियों ने
पिया घर आ

(समाप्त)

अखिलेश चंद्र श्रीवास्तव

हायकू श्रृंखला "चाँद "

मेरी  ताज़ी  रचना "चाँद" खास आपके लिए ..विधा है..हायकू श्रंखला

आज कुछ चाँद पर...

आज की खास पेशकश ..
आपकी खातिर..

"चाँद"
****

चाँद है गोल
रोटी भी होती गोल
बढ़ाये  भूँख

चाँद  मुखड़ा
बूटा तेरा बदन
ख़ुदा बचाये

तुम   हंसी हो
चाँद सी हो बेदाग़
इश्क की   आग़

माना हुस्न है
आपका   लाजवाब
चाँद  तो  नहीं

हैं दो दो चाँद
दोनों बापर्दा ..बुत
ऐ  मेरे ख़ुदा

(समाप्त)

अखिलेश चन्द्र श्रीवास्तव

हायकू श्रृंखला " माँ "

सुप्रभात मित्रों...

आज "माँ " को समर्पित चंद हायकू..

मेरी प्यारी माँ
बना  तुम्हारा प्यार ..
वज़ूद     मेरा

तुम लायीं  तो
आया  मैं भी जहाँ  में
मेरी प्यारी माँ

तुमने       मुझे
सिखाया जीना भी माँ
नादान    था मैं

बसी   जन्नत
तेरे क़दमों तले
मेरे लिये    माँ

आप जहाँ  भी
रहो    कृपा करना
ऐ प्यारी मम्मा

(समाप्त)

अखिलेश चंद्र श्रीवास्तव

हायकू श्रृंखला "यादें "

सुप्रभात मित्रों..

आज चंद हायकू" यादों "पर
जो चाहे अनचाहे बस चली आती हैं.. .. और जीवन का महत्वपूर्ण  अँग हैं..

"यादें"
*****

यादें आती हैं
अनायास  मन में
और  सतातीं

मैं  डूब डूब
जाता हूँ यादों में ही
होता उदास

ये यादें ही तो
सहारा  जीने का
और जिन्दा मैं

जीवन ख़त्म
उस  दिन टूटेगा
नाता यादों से

यादें   बेशक
खोलती है परतें
तन्हा मन की

(समाप्त)

अखिलेश चंद्र श्रीवास्तव